[13/01 7:59 AM] TOL Sarabjit Maan: ਗਰੁੱਪ ਦੇ ਸਾਰੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਮੁਬਾਰਕਾਂ ।
ਪਰਮਾਤਮਾ ਆਪ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਸੁਖ ਸ਼ਾਂਤੀ ਬਖਸ਼ੇ ।
ਆਪ ਦਿਨ ਦੁਗਨੀ ਰਾਤ ਚੌਗੁਣੀ ਤਰੱਕੀ ਕਰੋ ।
ਆਪ ਦਾ ਵਿਹੜਾ ਖੁਸ਼ੀਆਂ ਨਾਲ ਭਰਿਆ ਰਹੇ ।
[13/01 7:59 AM] TOl Noor Mann: Very very happy lohri to all my group friends
From :- Gurnoor singh noor
[13/01 8:09 AM] TOL Davinder Pal: Happy lohri to all our group members
[13/01 9:13 AM] TOl Dr. Prabhjot Singh: Oh Sunder and munder, Who will think about you…
He is Dulla Bhatti, Dulla’s daughter got married…
He gave 1 kg sugar, The girl is wearing a red suit…
But her shawl is torn, Who will stitch her shawl?…
The uncle made choori, The landlords looted it….
Landlords are beaten up then, Lots of innocent guys came to save….
One innocent boy got left behind, The police arrested him…
The policeman hit him with a brick, Give us lohri ..long live your couple…
Whether you cry, or bang your head later….Happy Lohri 2015 to u & ur family.....
[13/01 9:13 AM] TOl Dr. Prabhjot Singh: Sunder mundriye ho!
Tera kaun vicharaa ho!
Dullah Bhatti walla ho!
Dullhe di dhee vyayae ho!
Ser shakkar payee ho!
Kudi da laal pathaka ho!
Kudi da saalu paata ho!
Salu kaun samete!
Chacha gali dese!
Chache choori kutti! zamidara lutti!
Zamindaar sudhaye!
Bum Bum bhole aaye!
Ek bhola reh gaya!
Sipahee far ke lai gaya!
Sipahee ne mari itt!
Bhaanvey ro te bhaanvey pitt!
Sanoo de de Lohri, te teri jeeve jodi
[13/01 10:13 AM] TOL Dr. Bir: Lohri ki aag, aapke dukho ko jala de
Aur aag ki roshni, aapki zindagi me ujala bhar de.
Happy lohri to you sir
[13/01 10:40 AM] TOL Soninder Singh: ਲੋਹੜੀ ਦੀਆਂ ਆਪ ਸਭ ਨੂੰ ਲੱਖ ਲੱਖ ਵਧਾਈਆਂ ਜੀ..
[13/01 10:46 AM] TOL Parminder Vicky: Wish u very very happy lohri to all group members.....
[13/01 2:45 PM] TOL Dr. Arun: पेशवा बाजीराव
पेशवा बाजीराव मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे वे
छत्रपति शिवाजी महाराज के पोत्र शाहूजी महाराज
के प्रधान पेशवा थे.अपने पिता के वीरगति के बाद 20
साल की उम्र में बाजीराव ने पेशवा का पद संभाला और
मराठा साम्राज्य को उत्तर से दक्षिण तक
फेला दिया था.
विश्व इतिहास में बाजीराव पेशवा ही एक ऐसे सम्राट
हे जो एक भी युद्ध नहीं हारे,छत्रपति शिवाजी की तरह
बाजीराव भी बहुत कोशल योद्धा थे जब वे घोड़े से
भाला फेकते थे तो सामनेवाला घुड़सवार घोड़े के साथ
पहले ही गिर जाता था.
बाजीराव पेशवा ने हिन्दू साम्राज्य को इतना विशाल
रूप दे दिया था की मुग़ल औरग्जेब ने प्रत्यक्ष रूप में उनसे
मिलने से मन कर दिया था और मुग़ल वंश की नीव हिल
चुकी थी.
बाजीराव पेशवा के मालवा और गुजरात को जीतने के
बाद सामने राजपुताना था जिसमे बाजीराव पेशवा ने
राजपूत नीति लगाकर मारवाड़ जोधपुर,आमेर जयपुर,
मेवाड़ उदयपुर के साथ पुरे राजपुताना में मैत्री सम्बन्ध
लगाकर एक कर दिए थे.हिन्दू धर्मस्थल मथुरा और
सोमनाथ मुघलो के चंगुल से आजाद हो चुके थे.
बाजीराव की सबसे बड़ी सफलता महोबा के नजदीक बुंगश
खान को हराना था, जिसे मुगल सेना का सबसे बहादुर
सेनापति माना जाता था, और उसे तब परास्त
किया जब वह बुंदेलखंद के वृद्ध हिंदू राजा को परेशान
कर रहा था। बाजीराव के द्वारा प्रदान की गई इस
सैन्य सहायता ने छत्रसाल को हमेशा के लिए
उनका आभारी बना दिया।
यह कहा जाता है कि छत्रसाल मोहम्मद खान बुंगश के
खिलाफ बचाव की मुद्रा में आ गए थे, तब उन्होंने निम्न
दोहे के माध्यम से बाजीराव के पास एक संदेश भेजा था :
जो गति भई गजेंद्र की, वही गति हमरी आज।
बाजी जात बुंदेल की, बाजी रखियो लाज ॥
जब बाजीराव को यह संदेश प्राप्त हुआ तब वह
अपना भोजन ग्रहण कर रहे थे। वह भोजन छोड़कर तुरंत
उठ खड़े हुए और घोड़े पर सवार हो गए। यह देखकर
उनकी पत्नी ने कहा कि कम-से-कम आप भोजन तो ग्रहण
कर लें और तब जाएँ। तब उन्होंने अपनी पत्नी को उत्तर
दिया, "अगर देरी करने से छत्रसाल हार गये
तो इतिहास यही कहेगा कि बाजीराव
खाना खा रहा था इसलिए देर हो गयी।" वे यह निर्देश
देते हुए कुछ सैनिकों को लेकर तुरंत निकल गये
कि जितनी जल्दी हो पूरी सेना पीछे से आ जाये।
जल्दी ही बुंगश को हरा दिया गया और तब छत्रसाल ने
खुश होकर मराठा प्रमुख को अपने राज्य का एक तिहाई
हिस्सा प्रदान कर दिया।
मुगल, पठान और मध्य एशियाई जैसे बादशाहों के महान
योद्धा बाजीराव के द्वारा पराजित हुए। निजाम-उल-
मुल्क, खान-ए-दुर्रान, मुहम्मद खान ये कुछ ऐसे योद्धाओं
के नाम हैं, जो मराठों की वीरता के आगे
धराशायी हो गये।
बाजीराव पेशवा ने 41 युद्ध किये और एक भी युद्ध हारे
नहीं इसी वजह से दुनिया में उनको नेपोलियन से
तुलना करी जाती है।
[13/01 4:40 PM] Dr Amarjeet Astrologist: some more expressions of truth;from my all time fav book..tittle;
"nice to meet you and good by "
[13/01 4:41 PM] Dr Amarjeet Astrologist: thnx fr daily valueable info arun mishra ji !
[13/01 4:42 PM] TOL Dr. Arun: लोहड़ी को जानें।
लोहड़ी शब्द तिल + रोड़ी शब्दों के मेल से बना है, जो समय के साथ बदल कर तिलोड़ी और बाद में लोहड़ी हो गया। पंजाब के कई इलाकों मे इसे लोही या लोई भी कहा जाता है।
लोहड़ी का सबंध कई ऐतिहासिक कहानियों के साथ जोड़ा जाता है, पर इस से जुड़ी प्रमुख लोककथा दुल्ला भट्टी की है जो मुगलों के समय का एक बहादुर योद्धा था, जिसने मुगलों के बढ़ते जुल्म के खिलाफ कदम उठाया। कहा जाता है कि एक ब्राह्मण की 2 लड़कियों सुंदरी और मुंदरी के साथ इलाके का मुगल शासक जबरन शादी करना चाहता था, पर उन दोनों की सगाई कहीं और हुई थी और उस मुगल शासक के डर से उनके भावी ससुराल वाले शादी के लिए तैयार नहीं थे।
इस मुसीबत की घडी में दुल्ला भट्टी ने ब्राह्मण की मदद की और लडके वालों को मना कर एक जंगल में आग जला कर सुंदरी और मुंदरी का व्याह करवाया। दुल्ले ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया। कहते हैं दुल्ले ने शगुन के रूप में उनको शक्कर दी थी। इसी कथा की हमायत करता लोहड़ी का यह गीत है, जिसे लोहड़ी के दिन गाया जाता है :
सुंदर, मुंदरिये हो,
तेरा कौन विचारा हो,
दुल्ला भट्टी वाला हो,
दुल्ले धी (लडकी)व्याही हो,
सेर शक्कर पाई हो।
दुल्ला भट्टी की जुल्म के खिलाफ मानवता की सेवा को आज भी लोग याद करते हैं और उस रात को लोहड़ी के रूप में सत्य और साहस की जुल्म पर जीत के तौर पर मनाते हैं। इस त्योहार का सबंध फसल से भी है, इस समय गेहूँ और सरसों की फसलें अपने यौवन पर होती हैं, खेतों में गेहुँ, छोले और सरसों जैसी फसलें लहराती हैं।
लोहड़ी के दिन गाँव के लड़के-लड़कियाँ अपनी-अपनी टोलियाँ बना कर घर-घर जा कर लोहड़ी के गाने गाते हुए लोहड़ी माँगते हैं। इन गीतों में दुल्ला भट्टी का गीत 'सुंदर, मुंदरिये हो,तेरा कौन विचारा हो...' , 'दे माई लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी' , 'दे माई पाथी तेरा पुत्त चड़ेगा हाथी' आदि प्रमुख हैं। लोग उन्हें लोहड़ी के रूप में गुड, रेवड़ी, मूँगफली, तिल या फिर पैसे भी देते हैं। यह टोलियाँ रात को अग्नि जलाने के लिए घरों से लकडियाँ, उपलें आदि भी इकट्ठा करती हैं, और रात को गाँव के लोग अपने मुहल्ले में आग जला कर गीत गाते, भांगडा-गिद्धा करते, गुड, मूँगफली, रेवड़ी, धानी खाते हुए लोहड़ी मनाते हैं। अग्नि में तिल डालते हुए 'ईशर आए दलिदर जाए, दलिदर दी जड चुल्हे पाए' बोलते हुए अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
लोहड़ी का सबंध नए जन्मे बच्चों के साथ ज्यादा है। पुराने समय से ही यह रीत चली आ रही है कि जिस घर में लड़का जन्म लेता है, उस घर में लोहड़ी मनाई जाती है। लोहड़ी के कुछ दिन पहले पूरे गाँव में गुड़ बाँटा जाता है और लोहड़ी की रात सभी गाँव वाले लड़के के घर आते हैं और लकड़ियाँ, उपलें आदि से अग्नि जलाई जाती है। सभी को गुड़, मूँगफली, रेवड़ी, धानी आदि बाँटे जाते हैं।
आजकल कुछ लोग कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लड़कियों के जन्म पर भी लोहड़ी मनाने लगे हैं, ताकि रुढ़ीवादी लोगों में लड़का-लड़की के अंतर को खत्म किया जा सके। कई इलाकों में विवाहित जोड़ी की पहली लोहड़ी मनाई जाती है, जिसमें लोहड़ी की पवित्र आग में तिल डालने के बाद जोड़ी बड़े-बुजुर्गो से आशीर्वाद लेती है।
लोहड़ी की रात गन्ने के रस की खीर बनाई जाती है और उसे अगले दिन माघी के दिन खाया जाता है, जिस के लिए 'पोह रिद्धी माघ खाधी' जैसी कहावत जुड़ी हुई है, मतलब कि पौष में बनाई खीर माघ में खाई गई। ऐसा करना शुभ माना जाता है।
समय के बदलते रंग के साथ कई पुरानी रस्में और त्योहारों का आधुनिकीकरण हो गया है, लोहड़ी पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। अब गाँव में लड़के-लड़कियाँ लोहड़ी माँगते हुए 'दे माई पाथी तेरा पुत्त चड़ेगा हाथी' या 'दुल्ला भट्टी वाला हो, दुल्ले धी व्याही हो' जैसे गीत गाते दिखाई नहीं देते, शायद कुछ लोगों को तो इन गीतों और लोहड़ी के इतिहास के बारे में पता भी नहीं होगा। लोहड़ी के गीतों का स्थान 'डीजे' ने ले लिया है।
भले कुछ भी हो, लेकिन लोहड़ी रिश्तों की मधुरता, सुकून और प्रेम का प्रतीक है। दुखों का नाश, प्यार और भाईचारे से मिल-जुल कर नफरत के बीज का नाश करने का नाम है लोहड़ी। लोहड़ी की रात परिवार और सगे-सबंधियों के साथ मिल बैठ कर हँसी-मजाक, नाच-गाना कर रिश्तों में मिठास भरने, सदभावना से रहने का संदेश देती है। लोहड़ी की महत्ता आज भी बरकरार है, उम्मीद है कि पवित्र अग्नि का यह त्योहार मानवता को सीधा रास्ता दिखाने और रूठों को मनाने का जरिया बनता रहेगा।
आपको लोहड़ी की ढेर सारी शुभकामनाएँ !!!!
[13/01 7:12 PM] TOL Dr. Bir: Today is d designated time....dont hesitate...ego is not going to help us anywhere..Get rid of IT...
[13/01 7:12 PM] TOL Dr. Bir: Friends..be serious..
Burn The EGO
[13/01 7:12 PM] TOL Dr. Bir: My Best wishes to all.dr hs bir.
[13/01 11:48 PM] TOL Dr. Arun: खादी के वस्त्रो का अद्भुत लाभ।
खादी वस्त्र पर मेरे अनुभव-
१) मैं पिछले १ साल से अधिक से केवल खादी के ही वस्त्र खरीद रहा हूँ। पहले में समझता था की खादी से केवल कुर्ता ही बन सकता है लेकिन मैं गलत था खादी से कमीज वा पेन्ट बहुत अच्छी फिटिंग के साथ बनते है।
२) मैं अधिकतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करता हूँ। जिसके कारण गर्मियों में अत्यधिक पसीने तथा सर्दियों में अत्यधिक ठंड लगती थी।
लेकिन खादी की कमीज में गर्मी कम लगने के परिणाम स्वरूप पसीने बहुत कम आते है तथा ठण्ड भी कम लगती है।
३) पहले अत्यधिक पसीने आने पर तन से अत्यधिक दुर्गंध आती थी जिसको छुपाने के लिए aix deo लगाना पङता था जिसकी कीमत लगभग १८० रूपये होती है तथा १५ दिन चलता था। सालाना खर्चा ४५०० रूपये लगभग बैठता था।
खादी पहनने के बाद पसीने बहुत कम आने के साथ साथ शरीर से दुर्गंध बिल्कुल नहीं आती अथार्त इस फालतू के खर्चे तथा परेशानी से निजात मिली।
४) पहले एक रेडिमेड कमीज का खर्चा ६०० से ९०० रूपये आता था।
६ महिने निरंतर उपयोग के बाद पहले रंग फिका हो जाता था १०-११ महिने के उपरांत यह कोलर तथा बहों पर से फटने लगती थी।
अब खादी की कमीज का उत्तम कपङा ₹२२० का तथा सिलाई ₹१३० कुल खर्चा ₹३५० मात्र पङता है। एक वर्ष से अधिक से निरंतर पहन रहा हूँ ना रंग फीका पङा है ना कहीं से फटी है। हाँ लेकिन कमीज जो २ वर्ष से अधिक पुरानी है उसका रंग जरूर थोड़ा फीका पङ गया है।
५) हाँ एक गड़बड़ जरूर हूई है। खादी पहनना शुरू करने से कुछ ही समय पहले कुछ महगें रेडिमेड कपङे खरीदें थे जिनको पहनने की अब इच्छा ही नहीं होती। तो धर्मपत्नी जी के ताने जरूर सुनने पङते हैं कि इतने महगें कपङे घर में धूल फाक रहे है।
६) मेरे खादी के फायदे के अनुभवों को देखते हुए धर्मपत्नी ने भी इस बार अपने लिए दो शूटो के कपङे खादी के लिये है। जिसका अनुभव अगले वर्ष साझा करूँगा।
७) खादी के तौलिये (अंगोछे) के अनुभव भी बहुत शानदार है। इससे बहुत अच्छे प्रकार से बदन पुछता तथा साफ होता है। देखने में पतले लगते है तथा लगता है की पूरा शरीर नहीं पुछ पाऐगा लेकिन मोटी हौजरी के तौलिये की अपेक्षा ज्यादा अच्छा सुखाता है ये।
विनती-आप सभी से विनति करता हूँ की सबसे पहले एक खादी की कमीज जरूर वनबाए।उसके बाद मैं शर्तिया कह सकता हूँ की आप खादी के अलावा कुछ नहीं पहनेंगे।
एक विनती और स्वदेशी प्रयोग के साथ साथ उसके अनमोल लाभ भी लोगों को बताए।
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