[03/02 7:47 AM] TOL SARBJIT MAAN: दिमाग पर जोर डाल कर गिनते हो गलतियां मेरी...
कभी दिल पर हाथ रख कर पूछना कसूर किसका था...
[03/02 1:06 PM] TOL Brahm Sharma: बलिदान ना सही पर हम छोटे काम तो कर सकते हैं:-
1. कचरा सड़क पर ना फैंकें
2. सड़कों, दीवारों पे ना थूकें
3. नोटों, दीवारों पर ना लिखें
4. गाली देना छोड़ दें
5. पानी लाइट बचाएँ
6. एक पोधा लगाएँ
7. किसी भी धर्म पर टिप्पणी न करें
8. ट्रेफिक रूल्स ना तोडें
9. रोज़ माता पिता का आशीर्वाद लें
10. लड़कियों की इज्जत करें
देश को नहीं, पहले खुद को बदलें.
अब ये मेसेज 10 लोगोँ को भेज दें तो देश का अवश्य भला होगा...
[03/02 2:30 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: वो दुश्मन बनकर मुझे जीतने निकले थे..
दोस्ती कर लेते ,मैं खुद ही हार जाता"°°°
[03/02 3:01 PM] +91 94251 91857: आनेवाला फरवरी महीना आप की जिंदगी में दुबारा कभी नहीं आएगा क्यों की इस बार फरवरी महीने में कुछ खास बात है। इस बार फरवरी में
4 रविवार है
4 सोमवार है
4 मंगलवार है
4 बुधवार है
4 गुरुवार है
4 शुक्रवार है और
4 शनिवार है
ऐसा संयोग फरवरी महीने में हर 823 सालों में एक ही बार आता है।
🙏
[03/02 8:05 PM] +91 94251 91857:
स्वयं विचार कीजिये :-
इतना कुछ होते हुए भी
शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
मौन होना सब से बेहतर है।
दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
सफेद रंग सब से बेहतर है।
खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है।
पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है।
देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है।
सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है।
जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतरहै।
इंसान के अंदर जो समा जायें वो "स्वाभिमान"
और
जो इंसान के बहार छलक जायें वो "अभिमान".."
🌱🌱🌱
इत्र से कपड़ों को महकाना बड़ी बात नहीं ...
मज़ा तो तब है जब खुशबु आपके किरदार से आये .
[03/02 8:05 PM] +91 94251 91857: मैंने .. हर रोज .. जमाने को .. रंग बदलते देखा है ....
उम्र के साथ .. जिंदगी को .. ढंग बदलते देखा है .. !!
वो .. जो चलते थे .. तो शेर के चलने का .. होता था गुमान..
उनको भी .. पाँव उठाने के लिए .. सहारे को तरसते देखा है !!
जिनकी .. नजरों की .. चमक देख .. सहम जाते थे लोग ..
उन्ही .. नजरों को .. बरसात .. की तरह ~~ रोते देखा है .. !!
जिनके .. हाथों के .. जरा से .. इशारे से .. टूट जाते थे ..पत्थर ..
उन्ही .. हाथों को .. पत्तों की तरह .. थर थर काँपते देखा है .. !!
जिनकी आवाज़ से कभी .. बिजली के कड़कने का .. होता था भरम ..
उनके .. होठों पर भी .. जबरन .. चुप्पी का ताला .. लगा देखा है .. !!
ये जवानी .. ये ताकत .. ये दौलत ~~ सब ख़ुदा की .. इनायत है ..
इनके .. रहते हुए भी .. इंसान को ~~ बेजान हुआ देखा है ... !!
अपने .. आज पर .. इतना ना .. इतराना ~~ मेरे .. युवा यारों ..
वक्त की धारा में .. अच्छे अच्छों को ~~ मजबूर हुआ देखा है .. !!!
कर सको......तो किसी को खुश करो......दुःख देते ........तो हजारों को देखा है......
[03/02 8:14 PM] TOL SARBJIT MAAN: ਸਾਥੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਲੋਕ ਤੁਰੇ ਜੋ ਕੁਝ ਅਟਕੇ ਕੁਝ ਭਟਕੇ,
ਅਸੀਂ ਹਨੇਰੇ ਚੀਰ ਕੇ ਲੰਘਣਾ ਵਣ ਚੋਂ ਜਿਵੇਂ ਸਮੀਰ!
-ਜਗਤਾਰ
No comments:
Post a Comment