[14/03 8:17 AM] Dr Amarjeet Astrologist: हरमन हैस को दुनिया ने तब जाना, जब तमाम भाषाओं में उनका उपन्यास 'सिद्धार्थ' सामने आया और उस पर कई फ़िल्में भी बनीं। हरमन एक गहरे स्नायु रोग से पीड़ित थे और उन्होंने बारी-बारी तीन शादियाँ कीं। तन और मन के खेलों से उबरने की अदम्य प्यास ने उन्हें सांसारिक चीज़ों के आकर्षण से ऊबा दिया और उसी का नतीजा रहा 'सिद्धार्थ' जैसी अमूल्य कृति! उनका मानना था कि कोई भी व्यक्ति किसी का भी अनुयायी बन कर बुद्धत्व नहीं पा सकता। उसे अपने ही बूते से चल कर अपने ही पाए पर पहुंचना होता है। सिद्धार्थ अपने पुत्र को अपने साथ नहीं रहने देता, ताकि वह उसकी छाया से मुक्त रह कर स्वयं अपना सत्य पाए। हरमन किसी भी तरह के संघ या संगठन से मुक्त मन के लिए रचनारत थे।
[14/03 8:25 AM] Dr Amarjeet Astrologist: शब्द और वस्त्र कामचलाऊ हैं। इन्हें उपयोग में लाना और बदलना ज़रूरी है।
इन्हें निरंतर दिखावा बनाना अपनी आंतरिक दरिद्रता का अहंकारी ढिंढोरा पीटना ही तो है!
इनका उपयोग समझते ही हम बातूनियों के बोझ से मुक्त हो वास्तविक गिनेचुनों में आ जाते हैं।
[14/03 8:28 AM] Dr Amarjeet Astrologist: ख़ाली दिमाग़ शैतान का नहीं, भगवान का घर है।
Empty Mind is not a Devil's Workshop.
It is Divine's Workshop.
[14/03 9:03 AM] TOL Amrinder Singh: "ਅਜਲਾਂ" ਤੋਂ ਆਏ ਉਡੀਕ ਕਰਦੇ,
ਸੀਨਾ ਜੋਰੀਆਂ ਮੁਕਣ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੀਆਂ ਨੀ।
ਲੱਗੀਆਂ ਡੋਰੀਆਂ "ਖਾਸ" ਦੇ ਮੋਢਿਆਂ ’ਤੇ,
"ਆਮ" ਬੰਦੇ ਨੂੰ ਜ਼ਰਾ ਵੀ ਭਾਉਂਦੀਆਂ ਨੀ।
ਜਿਹੜੀਆਂ ਤਾਕਤਾਂ ਲਹੂ ਦੇ ਕੈਂਪ ਲਾਵਣ,
ਲੱਗੀ ਤੇਹ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਪਿਲਾਉਂਦੀਆਂ ਨੀ।
ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਹੈ ਨਾਟਕੀ ਕਰਨ ਹੁੰਦਾ,
ਨੁਕਤਾ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਵੀ ਸਮਝਾਉਂਦੀਆਂ ਨੀ।
ਬਣ ਕੇ ਸੌਕਣਾਂ ਜਿਹੜੀਆਂ ਆ ਜਾਵਣ,
ਆ ਕੇ ਘਰਾਂ ਨੂੰ ਕਦੇ ਵਸਾਉਂਦੀਆਂ ਨੀ।
ਜਿਹਨਾਂ ਧਿਰਾਂ ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਦਰਦ ਹੁੰਦਾ,
ਫਿਰਕੂ ਅੱਗ ਤੇ ਤੇਲ ਛਿੜਕਾਉਂਦੀਆਂ ਨੀ।
ਜ਼ੋਰਾਵਰਾਂ ਨੇ ਜੇਬ ਵਿਚ "ਰੱਬ" ਪਾਇਆ,
ਤਾਹੀਂ "ਸੰਗਤਾਂ" ਕੋਲ ਤੋਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਨੀ।
[14/03 3:13 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: आ तेरे पैरों पे मरहम लगा दूँ,
ऐ मुकद्दर,
कुछ चोट तुझे भी आई होगी,
मेरे सपनों को ठोकर मारने के बाद..!!
[14/03 7:05 PM] +91 94654 00040: वो कल जो थी, आज भी वही है, और कल भी वही रहेगी,
रोज जिस में नई तस्वीरें छपे, ये दिल वो अख़बार नही..।।
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