[02/04 8:10 AM] TOl Dr. Prabhjot Singh: शरीर और आत्मा की बातें
चलो सुनते हैं :-
सुबह के 4 बजे:-
आत्मा -
चलो उठो साधना का समय
हो गया है ! उठो ना !
शरीर -
सोने दो न ! क्यों तंग कर
रही हो ? पता नहीं क्या रात
को बहुत देर से
सोया था.........
थोड़ी देर के
बाद साधना करूँगा ।
आत्मा -
बोली ठीक है
और मन में सोचने लगी मुझे भूख लगी है और ये है क़ि
समझता ही नहीं है 😥
सुबह के 6:-
बजे तो
आत्मा बोली - अब तो उठ जाओ भाई !
सूरज भी आपनी किरणे फैलाते
हुए हमें उठा रहा है उठो न
plzzzzz.
शरीर -
कितना परेशान करती हो ! ठीक
है उठ रहा हूँ
बस 5 मिनट और सोने
दो !
आत्मा छटपटाती हुई शरीर के इंतजार
में
कि ये कब उठेगा और कब मेरी भूख
को शांत करेगा !!!!!
थोड़ी देर
बाद साधना में बैठने के लिए शरीर
ने वक्त निकाला 20-25 मिनट
साधना में बैठा और
आत्मा कुछ तृप्त ही हुई
थी की शरीर उठ गया.......
आत्मा - अरे रे रे रे क्या हुआ
क्यों उठ गए अभी तो मैं तृप्त
हुई भी नहीं हूँ कि तुम उठ रहे
हो !!!!!
क्या हुआ भाई ? कहाँ जा रहे
हो ?
शरीर - अरे मुझे (ऑफिस
or घर का ) काम पर जाना है
तुम्हारी तो कुछ समझ में ही
नहीं आता !!!!
आत्मा - ठीक है
शाम को तो साधना करोगे न ?
शरीर - (परेशान होते हुए )
हाँ भई हाँ ।
सारा दिन निकल
गया आत्मा भूख के तड़पते
हुए ......शाम हो गई आत्मा खुश
हुई
चलो अब तो मेरी भूख
का निवारण हो ही जायेगा ...
शरीर ऑफिस और घर के काम से
कुछ फ्री हुआ ही
था की
आत्मा आवाज
देती है ।
आत्मा - अरे
फ्री हो गए ! अब तो चल
ही सकते हो साधना के लिए
चलो न ।
शरीर -
क्यों सारा दिन तंग
करती रहती हो ? देखती नहीं हो मैं
अभी ऑफिस और घर के कामों से फ्री हुआ हूँ,
थक गया हूँ ।
आत्मा - अरे तुम थके
हुए हो तो साधना में जैसे ही बैठोगे
तो तुम्हारी थकान चुटकी में
दूर हो जाएगी ...
शरीर -
नहीं अभी नहीं रात
को पक्का बैठूँगा ।
शरीर की स्थिति- आँखें
नींद में भरी हुई, थकान से
बुरा हाल जैसे-तैसे
आत्मा की ख़ुशी के लिए
साधना में बैठे
आत्मा की कुछ भूख शांत हुई ही थी की यहाँ शरीर की आँखे नींद
से भर गई ..
शरीर उठा और सोने
के लिए जाने ही लगा था क़ि ..
आत्मा बोल उठी -
अरे अरे क्या हुआ क्यों उठ गए अभी बैठे
ही थे की उठ भी गए ।
शरीर - मैं
थक गया हूँ यार !!
कल सुबह
को पक्का 4 बजे उठ के
साधना करुगा
आत्मा - तुम फिर
से बहाना बना रहे हो तुम
नहीं उठोगे मुझे पता है ।
आत्मा दुखी होकर चुप हो गई😓
तभी शरीर ने मोबाइल पर msg
देखा ।
शरीर - अरे ये तो मेरे
best frd का msg है
चलो थोड़ी देर चैटिंग करके
सोता हूँ ...
आत्मा सोचती है मन
ही मन
(देखो साधना के वक्त तो
इसे नींद आ रही थी और अब
देखो friends से बात करने के वक्त
नींद ही गायब हो गई ।
जिसकी वजह से इसका अस्तित्व
है उसी की ही परवाह
नहीं है इसे)
आत्मा - खैर चलो कल
देखते है।
परंतु फिर वही दिनचर्या सुबह
के 4 बजे से रात के वक्त तक और
आत्मा भूखी की भूखी रह जाती है ।
😢
😡😡क्या आपको पता है?
क्रोध का पूरा खांनदान है......
:-क्रोध की एक लाडली बहन है
II जिद ॥
:-क्रोध की पत्नी है.....
॥ हिंसा ॥
:-क्रोध का बडा भाई है
॥ अंहकार ॥
:-क्रोध का बाप जिससे वह डरता है.....
॥ भय ॥
:-क्रोध की बेटिया हैं
॥ निंदा और चुगली ॥
:-क्रोध का बेटा है......
॥ बैर ॥
:-इस खानदान की नकचडी बहू है.....
॥ ईर्ष्या॥
:-क्रोध की पोती है......
॥ घृणा ॥
:-क्रोध की मां है ......
॥ उपेक्षा ॥
और क्रोध का दादा है
।। द्वेष ।।
तो इस खानदान से हमेशा
दूर रहें और हमेशा खुश रहो।
इस मेसज को आगे भेजकर सबको इस खानदान के बारे जानकारी दे।
एक मित्र ने बहुत ही सुंदर पंक्तियां भेजी है, फारवर्ड करने से खुद को रोक नहीं पाया ....
जीभ जन्म से होती है
और मृत्यु तक रहती है.....
क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है
और मृत्यु से पहले चले जाते हैं..
क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो
मिलेगी हर बड़ी रहमत...
बड़ा होने पर तो
माँ भी गोद से उतार देती है.
पानी के बिना नदी बेकार है,
अतिथि के बिना आँगन बेकार है,
प्रेम न हो तो सगे-सम्बन्धी बेकार है,
पैसा न हो तो पाकेट बेकार है,
और जीवन में गुरु न हो
तो जीवन बेकार है,,
इसलिए जीवन में
"गुरु"जरुरी है.. "गुरुर" नही.ं
यदि कबीर जिन्दा होते तो आजकल के दोहे यह होते :-
🔹नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात!
बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात!!
🔹पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ लाज!
कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज!!
🔹भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास!
बहन पराई हो गयी, साली खासमखास!!
🔹मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश!
बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश!!
🔹बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान!
पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान!!
🔹पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग!
मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग!!
🔹फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर!
पापी करते जागरण, मचा-मचा कर शोर!
🔹पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप!
भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप!
!! बेटी को जिसने मरवा दिया था पत्नी के कोख
में,
मोहल्ले में लडकिया ढूँढ रहा है नवरात्रे के कन्या
भोज में [truncated by WhatsApp]
[02/04 9:47 AM] TOL Ravi2: Osho-अधिक से अधिक भोले, कम
ज्ञानी और बच्चों की तरह बनिए.
जीवन को मजे के रूप में लीजिये
– क्योंकि वास्तविकता में यही
जीवन है
[02/04 8:48 PM] TOL Dr. Bir: अगर बारिश हो तो बारिश में नहाती युवतियां; अगर गर्मी हो तो धूप में तपती युवतियां; अगर एग्जाम हो तो परीक्षा देती युवतियां; अगर ट्रैफिक हो तो जाम में फंसी युवतियां; अगर मौसम अच्छा हो तो मौसम का लुत्फ उठाती युवतियां; साला अखबार वालों को पता नहीं कभी हम लड़के नजर क्यों नही आते।
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