[04/04 8:39 AM] Sarbjit singh: जो फकीरी मिजाज़ रखते हैं वो ठोकरो
में ताज रखते हैं. .....
जिनको कल की फिकर नहीं वो मुठ्ठी में
आज रखते हैं !!!!!!!
[04/04 9:09 AM] TOl Dr. Prabhjot Singh: अमेरिका सबसे धनी देश है, वहां के स्कूल साल के
शुरुआत में बच्चों को किताबें इशू करते हैं और साल
के अंत में उनसे जमा करा लेते है ताकि दुसरे
बच्चों को उन किताबों को पढने
का मौका मिले.
भारत गरीब देश है, पर यहाँ हर साल पुराने किताबों को रददी के भाव बेच दिया जाता है
और नए किताबों को ख़रीदा जाता है, या यूँ
कहें की अभिभावकों को नई किताब खरीदने
को विवश
किया जाता है .....करोड़ो रुपयों की बर्बादी लाखों पेड़
की कटाई .... फिर पर्यावरण को बचाने की सतरंगी मुहीम फिर करोड़ों रूपये की लुट, .. ये
हमारे शिक्षा के मंदिर और और उसे संचालित
करने वाले दलालों द्वारा हो रहा है .... सत्ता तो बदल गयी पर व्यवस्था नही बदली
आइये मानव संसाधन विभाग
को जरा कुम्भ्करणी नींद से जगाया जाये ...अच्छा लगे तो उसे अपने दोस्तों को आगे बढाने का कष्ट करें ओर क्रांति लाओ pls send this to all ur group...
[04/04 11:20 AM] TOL Satinder Dhaliwal: Bank customer service best reply:
Customer - Agar mai aaj cheque jama karu to wo kab clear hoga?
Clerk - 3 din me.
Customer - Mera cheque toh samne wali bank ka hai....Dono bank amne-samne hai fir b itna samay Q ?
Clerk - Sir PROCEDURE to FOLLOW karna padta hai na.Socho aap kahi jaa rahe ho...aur baaju me hi Shamshaan hai...Agar aap Shamshan ke bahar hi mar gaye, to aapko pahle ghar lekar jayenge ya wahin nipta denge ?
Customer behosh.....😄😂😄😀
[04/04 5:10 PM] TOL Gagan: वो मेरे घर नहीं आता, मैं उसके घर नहीं जाता
मगर इन एहतियातों से तअल्लुक़ मर नहीं जाता
वसीम बरेलवी
[04/04 6:54 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: must read..... साड़ी और जींस वार्तालाप...........
एक दिन जींस और साड़ी में हो गई तकरार
कहा साड़ी ने ठसक से -
मैं हूँ मर्यादा,परम्परा,संस्कृति-संस्कार
सौ प्रतिशत देशी
तू क्यों घुस आई मेरे देश में विदेशी
वैदिक काल से मैं स्त्री की पहचान थी
आन-बान-शान थी
घूँघट आँचल और सम्मान थी
बेटियाँ बचपन में मुझे लपेट
माँ की नकल करती थीं
दसवीं के फेयरवेल तक
पिता को चिंतित कर देती थीं
उनकी पुतरी-कनिया भी
मुझे ही पहनती थीं
भारत माँ हों या हमारी देवियाँ
देखा है कभी किसी ने
मेरे सिवा पहनते हुए कुछ
जब से तू आई है बिगड़ गया है
सारा माहौल
हर जगह उड़ रहा है
मेरा मखौल
बेटियाँ तो बेटियाँ
गुड़िया तक जींस पहनने लगी है
गाँव-शहर की बड़ी-बूढ़ी भी
तुम्हारे लिए तरसने लगी हैं
ना तो तू रंग-बिरंगी है
ना रेशमी-मखमली
फिर भी जाने क्यों लगती है सबको भली
नए-नए फतवे हैं तुम्हारे खिलाफ
नाराज हैं तुमसे हमारे खाप
फिर भी तू बेहया-सी यहीं पड़ी है
मेरी प्रतिस्पर्धा में खड़ी है |
मुस्कुराई जींस -
बहन साड़ी मत हो मुझ पर नाराज
मैंने कहाँ छीना तुम्हारा राज
हो कोई भी पूजा-उत्सव
पहनी जाती हो तुम ही
सुना है कभी जींस में हुआ
किसी लड़की का ब्याह
फिर किस बात की तुमको आह
मैं तो हूँ बेरंग-बेनूर
साधारण-सी मजदूर
ना शिकन का डर,ना फटने का
मिलता है मुझसे आराम
दो जोड़ी में भी चल सकता है
वर्ष-भर का काम
तुम फट जाओ तो लोग फेंक देते हैं
मैं फट जाऊँ तो फैशन समझ लेते हैं
अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष का भेद मिटाती हूँ
कीमती समय भी बचाती हूँ
युवा-पीढ़ी को अधिक कामकाजी
सहज और जनतांत्रिक बनाती हूँ
सोचो जरा द्रौपदी ने भी जींस पहनी होती
क्या दुःशासन की इतनी हिम्मत होती
फिर भी जाने क्यों पंडित-मौलवी और खाप
रहते हैं मेरे खिलाफ
दीखता है उन्हें मुझमें अंहकार
और तुझमें संस्कार
जबकि सिर्फ अलग हैं हमारे नाम
करते हैं दोनों एक ही काम
सुनो बहन
देशी-विदेशी, अपने-पराये की बात आज बेकार
है
'बसुधैव-कुटुंबकम्' प्रगति का आधार ह
[04/04 7:27 PM] TOL Gagan: Watch What Happens When These Two Girls Realize They Are On TV http://desinema.com/watch-what-happens-when-these-two-girls-realize-they-are-on-tv/
[04/04 7:28 PM] TOL Chamkaur Singh: 👉13 साल लग गए
माननीय न्यायालय को ये जानने के लिए
कि कार सलमान नहीं
उसका ड्राइवर चला रहा था॥
धन्य हैं प्रभु...😂😂😂
👉 वो तो अच्छा है
पैसे में इतनी ताकत नहीं है
वर्ना काला हिरन खुद
जज के सामने आकर कहता
कि -मैंने तो आत्महत्या की थी ।
[04/04 8:55 PM] TOL Sarabjit Maan: जैसे ही बीवी कहती है सोच रही हूँ
मायके हो आऊँ.....
टिंडे की सब्जी भी पनीर लगने लगती है।।😂😂😜😜😎😜😜
[04/04 9:23 PM] TOL Gurpiyar Brar: ਮਥੁਰਾ- ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਦੀ ਨਗਰੀ ਸ੍ਰੀ ਵਰਿੰਦਾਵਨ ਧਾਮ 'ਚ ਜ਼ਬਰਦਸਤ ਗੜੇਮਾਰੀ ਹੋਈ ਹੈ। ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਕਾਰ ਦੇ ਸ਼ੀਸ਼ੇ ਤੱਕ ਟੁੱਟ ਗਏ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਗੜਿਆਂ ਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਹੈਰਾਨ ਰਹਿ ਜਾਓਗੇ। ਕੁਦਰਤ ਦੇ ਇਸ ਕਹਿਰ ਕਾਰਨ ਹਰ ਕੋਈ ਹੈਰਾਨ ਹੈ।
ਆਸਮਾਨ ਤੋਂ ਵਰ੍ਹੇ ਇਹ ਗੜੇ ਛੋਟੇ ਨਹੀਂ ਸਗੋਂ ਕਿ ਇਕ-ਇਕ ਗੜਾ 250 ਤੋਂ 300 ਗ੍ਰਾਮ ਦਾ ਹੈ। ਜ਼ਿਕਰਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਾਂ ਵੈਸ਼ਣੋ ਦੇਵੀ ਦੇ ਮੰਦਰ 'ਚ ਵੀ ਭਿਆਨਕ ਗੜੇਮਾਰੀ ਹੋਈ ਸੀ ਅਤੇ ਤੂਫਾਨ ਆਇਆ ਸੀ। ਜੰਮੂ ਕਸ਼ਮੀਰ 'ਚ ਵੀ ਕੁਝ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਭਾਰੀ ਬਾਰਸ਼ ਹੋਈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਹੜ੍ਹ ਆ ਗਿਆ ਸੀ। ਕੁਦਰਤ ਨਾਲ ਛੇੜਛਾੜ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖ ਵਲੋਂ ਮਨਮਰਜ਼ੀ ਨਾਲ ਦਰੱਖਤ ਵੱਢੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਕੁਦਰਤ ਵੀ ਆਪਣਾ ਰੰਗ ਦਿਖਾਉਂਦੀ ਹੈ
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