Monday, April 6, 2015

March29

[28/03 5:39 PM] TOL Satinder Dhaliwal: ⭕MOTIVATION⭕

एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे
आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें
टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ...
उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ...
आवाज आई ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये ,
फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ
.. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..

सर ने टेबल के नीचे से
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित
थोडी सी जगह में सोख ली गई ...

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया

इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ....

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं ,

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है ..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ...
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय
नहीं रहेगा ...

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने
बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ ,
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको ,
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है
... बाकी सब तो रेत है ..
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे ..

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया
कि " चाय के दो कप " क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ...
इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये ।

( अपने खास मित्रों और निकट के व्यक्तियों को यह विचार तत्काल बाँट दो .. मैंने अभी - अभी यही किया है
[29/03 8:04 AM] TOl Dr. Prabhjot Singh: किसी मज़ार पर एक फकीर रहते थे।
सैकड़ों भक्त उस मज़ार पर आकर दान-दक्षिणा चढ़ाते थे।
उन भक्तों में एक बंजारा भी था। वह बहुत गरीब था,फिर भी, नियमानुसार आकर माथा टेकता, फकीर की सेवा करता, और फिर अपने काम पर जाता,

उसका कपड़े का व्यवसाय था, कपड़ों की भारी पोटली कंधों पर लिए सुबह से लेकर शाम तक गलियों में फेरी लगाता,
कपड़े बेचता।

एक दिन उस फकीर को उस पर दया आ गई, उसने अपना गधा उसे भेंट कर दिया।

अब तो बंजारे की आधी समस्याएं हल हो गईं। वह सारे कपड़े गधे पर लादता और जब थक जाता तो खुद भी गधे पर बैठ जाता।

यूं ही कुछ महीने बीत गए, एक दिन गधे की मृत्यु हो गई।

बंजारा बहुत दुखी हुआ, उसने उसे उचित स्थान पर दफनाया, उसकी कब्र बनाई और फूट-फूट कर रोने लगा।

समीप से जा रहे किसी व्यक्ति ने जब यह दृश्य देखा, तो सोचा जरूर किसी संत की मज़ार होगी, तभी यह बंजारा यहां बैठकर अपना दुख रो रहा है।
यह सोचकर उस व्यक्ति ने कब्र पर
माथा टेका और अपनी मन्नत हेतु वहां प्रार्थना की कुछ पैसे चढ़ाकर वहां से चला गया।

कुछ दिनों के उपरांत ही उस व्यक्ति की कामना पूर्ण हो गई। उसने खुशी के मारे सारे गांव में डंका बजाया कि अमुक स्थान पर एक पूर्ण फकीर की मज़ार है।
वहां जाकर जो अरदास करो वह पूर्ण होती है। मनचाही मुरादे बख्शी जाती हैं वहां।

उस दिन से उस कब्र पर भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। दूर-दराज से भक्त अपनी मुरादे बख्शाने वहां आने लगे। बंजारे की तो चांदी हो गई, बैठे-बैठे उसे कमाई का साधन मिल गया था।

एक दिन वही फकीर जिन्होंने बंजारे
को अपना गधा भेंट स्वरूप दिया था वहां से गुजर रहे थे। उन्हें देखते ही बंजारे ने उनके चरण पकड़ लिए और बोला- "आपके गधे ने तो मेरी जिंदगी बना दी। जब तक जीवित था, तब तक मेरे रोजगार में मेरी मदद करता था और
मरने के बाद मेरी जीविका का साधन बन गया है।"

फकीर हंसते हुए बोले, "बच्चा! जिस मज़ार पर तू नित्य माथा टेकने आता था, वह मज़ार इस गधे की मां की थी।"
😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀

बस यूही चल रहा है मेरा भारत महान ।
          Incredible India.
[29/03 4:06 PM] ‪+91 97799 51799‬: गुस्सा अकेला आता हैं
मगर हमसे सारी अच्छाई ले जाता हैं,

सब्र भी अकेला आता हैं मगर
हमें सारी अच्छाई दे जाता हैं !!

परिस्थितियां
जब विपरीत होती है,
तब व्यक्ति का
"प्रभाव और पैसा"
नहीं
"स्वभाव और सम्बंध"
काम आते है....
जीवन का एक महत्वपूर्ण सत्य:-

हम जब दिन की शुरुआत करते है,
तब लगता है की, पैसा ही जीवन है ..
लेकिन, जब शाम को लौट कर घर आते है,
तब लगता है, शान्ति ही जीवन है .!!
💞💐⭐💞💐⭐💞
[29/03 7:34 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: ARE YOU HAPPY?

After years of hard & dedicated service to his Company, Ajay was being appointed at an elegant reception as the new Director.

It was a small function where his wife Anita , a Home Executive & some of the wives of the other persons in top management were also present.

In an adjacent room, Ann, the wife of the CEO of the Company, asked Ajay's wife a very odd & usual question; "Does ur husband make u happy?"

The husband, Ajay, who at that moment was not at her side, but was sufficiently near to hear the question, paid attention to the conversation, sitting up slightly, feeling secure, even filling his chest lightly in pride & hope,  would definitely not publically lower or degrade her husband, would answer affirmatively, since she had always been there for him during their marriage and generally in life.

Nevertheless, to both his & the others' surprise, she replied simply; "No, no he doesn't make me happy…"

The room became uncomfortably silent, as if everyone were listening to the spouse's response. There was a sudden coldness in the air. The husband was petrified. A frown appeared on his face.
He couldn't believe what his wife was saying, especially at such an important occasion for him. To the amazement of her husband & of everyone!

Anita sat up firmly & explained in a modest but stern tone to the other wives who were present;
"No, he doesn't make me happy… I AM HAPPY. The fact that I am happy or not doesn't depend on him, but on me. GOD has granted each of us intellect & discretion to reason, interpret & decide. GOD made me the person upon which my happiness depends.

I make the choice to be happy in each situation & in each moment of my life.
If my happiness were to depend on other people, on other things or circumstances on the face of this earth, I would be in serious trouble!

Over my life I have learned a couple of things: I decide to be happy & the rest is a matter of 'experiences or circumstances' like helping, understanding, accepting, listening, consoling & with my spouse, I have lived & practiced this many times.

Honestly true happiness lies in being content"

Relieved & reassured, a smile was clearly noticed on Ajay's face.

Moral:
Happiness will always be found in contentment, forgiveness & in loving yourself & others.
To truly love is difficult, it is to forgive unconditionally, to live, to take the "experiences or  circumstances" as they are, facing them together & being happy with conviction.

There are those who say I cannot be happy  :
· Because I am sick.
· Because I have no money.
· Because it's too cold.
· Because they insulted me.
· Because someone stopped loving me.
· Because someone didn't appreciate me.

But what u don't know is that u can be happy even though u r sick, whether it is too hot, whether u have money or not, whether someone has insulted u, or someone didn't love u, or hasn't valued u.

Being Happy is an attitude about life & each one of us must decide!

Being Happy, depends on U !

It Depends on Me.
I fall. I rise. I make mistakes. I live. I learn. I've been hurt but I'm alive. I'm human. I'm not perfect but I'm Thankful.
[29/03 8:00 PM] ‪+91 94251 91857‬: 🎎 मनुष्य कितना मूर्ख है |
👉प्रार्थना करते समय समझता है कि भगवान सब सुन रहा है,
पर निंदा करते हुए ये भूल जाता है।
👉पुण्य करते समय यह समझता है कि भगवान देख रहा है,
पर पाप करते समय ये भूल जाता है।
👉दान करते हुए यह समझता है कि भगवान सब में बसता है,
पर चोरी करते हुए ये भूल जाता है।
👉प्रेम करते हुए यह समझता है कि पूरी दुनिया भगवान ने बनाई है,
पर नफरत करते हुए ये भूल जाता है।
......और हम कहते हैं कि मनुष्य सबसे बुद्धिमान प्राणी है।
[29/03 9:23 PM] TOL Satinder Dhaliwal: डेट और तारीख में फर्क:

दिल्ली, मुंबई, गोवा, बंगलोर और कलकत्ता के लड़के
डेट पर जाते हैं... 💏
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मुकतसर , मलोट, बठिंडा के लड़के
तारीख पर।🔫🔫🔫

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