[27/03 4:55 AM] Dr Amarjeet Astrologist: श्रीगंगानगर । सिपाही पद के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा देने आए एक युवक ने बुधवार को सबको चौंका दिया। एक घंटे में दस किलोमीटर रेस पूरी करनी थी लेकिन उसने तो करीब 33 मिनट में ही अपना काम पूरा कर दिया। मौके पर मौजूद पुलिस के आला अफसरों ने दौड़ को जारी रखने का इशारा किया तो चार मिनट में वह डेढ़ किमी और दौड़ गया। अफसरों ने उसकी प्रतिभा देखकर सेल्फी भी ली, मगर नौकरी का वादा फिर भी न कर सके। हनुमानगढ़ जिले के किशनुपरा उत्तरादा निवासी संदीप आचार्य ने महाराजा गंगासिंह खेल मैदान के चार सौ मीटर के एक घेरे के रेस कोर्ट पर भागना शुरू किया तो सबको पीछे ही छोड़ता चला गया। शेष युवकों ने जो काम एक घंटे की मेहनत से पूरा किया उससे ज्यादा काम उसने 37 वें मिनट में ही पूरा कर दिया।
मजदूर है परिवार संदीप ने बताया कि उसका परिवार मजदूरी करता है। वह किसी तरह प्राइवेट परीक्षाएं देकर गे्रज्युएशन कर सका है। पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिए उसने निजी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया है। दौड़ की अपनी विलक्षण प्रतिभा से अनजान संदीप का कहना है कि उसने कभी किसी से ट्रेनिंग नहीं ली। दोस्तों के साथ खेलते-खेलते ही इसमें निखार आया है। वह बताता है कि इससे पहले दो बार आर्मी भर्ती के दौरान भी वह इसी तरह का कारनामा कर अफसरों से एक्सीलेंट का खिताब तो हासिल कर चुका है, मगर नौकरी फिर भी नहीं मिली। 24 साल का संदीप बताता है कि दौड़ स्पर्धा का एक भी पुरस्कार उसके पास इसलिए नहीं है क्योंकि कभी उसे स्कूल में नियमित पढ़ाई का मौका ही नहीं मिला। सारी परीक्षाएं स्वपाठी के रूप में ही दीं।
राष्ट्रीय रिकार्ड के करीबउल्लेखनीय है कि 10 किमी दौड़ का राष्ट्रीय रिकार्ड 12 जुलाई 2008 में धावक सुरेंद्र सिंह ने बनाया था। उन्होंने यह दूरी 28.2 मिनट में पूरी की थी। बिना किसी प्रशिक्षण के करीब 33 मिनट में दस किमी की दौड़ पूरी करने वाले संदीप आचार्य को भी अगर तराशा जाए तो कई संभव है कि कई नए कीर्तिमान बन जाएं।
[27/03 6:25 AM] Dr Amarjeet Astrologist: Here is a new spiritual practice for you: don’t take your thoughts too seriously.”
— (via tolleteaching)
[27/03 10:57 AM] Sarbjit singh: बेटी को जिसने मरवा दिया था पत्नी
के कोख में,
मोहल्ले में लडकिया ढूँढ रहा है
नवरात्रे के कन्या भोज में...
[27/03 11:16 AM] TOl Dr. Prabhjot Singh: भगत सिंह के खिलाफ गवाही देने वाले गद्दारों की कहानी:-
जनता को नहीं पता है कि भगत सिंह के विरुद्ध गवाही देने वाले दो प्रमुख व्यक्ति कौन थे ?
जब दिल्ली में भगत सिंह पर अंग्रेजों की अदालत में असेंबली में बम फेंकने का मुकद्दमा चला तो भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त के खिलाफ. शोभा सिंह. ने गवाही दी और दूसरा गवाह था शादी लाल !
दोनों को वतन से की गई इस गद्दारी का इनाम भी मिला। दोनों को न सिर्फ सर की उपाधि दी गई बल्कि और भी कई दूसरे फायदे मिले। शोभा सिंह को दिल्ली में बेशुमार दौलत और करोड़ों के सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके मिले आज कनाॅट प्लेस में सर शोभा सिंह स्कूल में कतार लगती है बच्चो को प्रवेश नहीं मिलता है जबकि शादी लाल को बागपत के नजदीक अपार संपत्ति मिली ।आज भी श्यामली में शादीलाल के वंशजों के पास चीनी मिल और शराब कारखाना है ।
सर शादीलाल और सर शोभा सिंह के प्रति भारतीय जनता कि नजरों मे घृणा थी, जो अब तक है ।
लेकिन शादी लाल को गांव वालों का ऐसा तिरस्कार झेलना पड़ा कि उसके मरने पर किसी भी दुकानदार ने अपनी दुकान से कफन का कपड़ा तक नहीं दिया । शादी लाल के लड़के उसका कफ़न दिल्ली से खरीद कर ले गए तब जाकर उसका अंतिम संस्कार हो पाया था ।
शोभा सिंह खुशनसीब रहा । उसे और उसके पिता सुजान सिंह (जिसके नाम पर पंजाब में कोट सुजान सिंह गांव और दिल्ली में सुजान सिंह पार्क है) को राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हजारों एकड़ जमीन मिली और खूब पैसा भी । उसके बेटे खुशवंत सिंह ने शौकिया तौर पर पत्रकारिता शुरु कर दी और बड़ी-बड़ी हस्तियों से संबंध बनाना शुरु कर दिया । सर सोभा सिंह के नाम से एक चैरिटबल ट्रस्ट भी बन गया जो अस्पतालों और दूसरी जगहों पर धर्मशालाएं आदि बनवाता तथा मैनेज करता है ।
आज दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास बाराखंबा रोड पर जिस स्कूल को मॉडर्न स्कूल कहते हैं वह शोभा सिंह की जमीन पर ही है और उसे सर शोभा सिंह स्कूल के नाम से जाना जाता था ।
खुशवंत सिंह ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर अपने पिता को एक देश भक्त और दूरद्रष्टा निर्माता साबित करने का भरसक कोशिश की।
खुशवंत सिंह ने खुद को इतिहासकार भी साबित करने की भी कोशिश की और कई घटनाओं की अपने ढंग से व्याख्या भी की। खुशवंत सिंह ने भी माना है कि उसका पिता शोभा सिंह 8 अप्रैल 1929 को उस वक्त सेंट्रल असेंबली में मौजूद था जहां भगत सिंह और उनके साथियों ने धुएं वाला बम फेका था।
बकौल खुशवंत सिह, बाद में शोभा सिंह ने यह गवाही दी, शोभा सिंह 1978 तक जिंदा रहा और दिल्ली की हर छोटे बड़े आयोजन में बाकायदा आमंत्रित अतिथि की हैसियत से जाता था।हालांकि उसे कई जगह अपमानित भी होना पड़ा लेकिन उसने या उसके परिवार ने कभी इसकी फिक्र नहीं की। खुशवंत सिंह का ट्रस्ट हर साल सर शोभा सिंह मेमोरियल लेक्चर भी आयोजित करवाता है जिसमे बड़े-बड़े नेता और लेखक अपने विचार रखने आते हैं, बिना शोभा सिंह की असलियत जाने (य़ा फिर जानबूझ कर अनजान बने) उसकी तस्वीर पर फूल माला चढ़ा आते हैं । और भी गवाह निम्न लिखित थे।
1. दिवान चन्द फ़ोगाॅट
2. जीवन लाल
3. नवीन जिंदल की बहन के पति का दादा
4. भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दादा
दीवान चन्द फोगाॅट D.L.F. कम्पनी का founder था इसने अपनी पहली कालोनी रोहतक में काटी थी इसकी इकलौती बेटी थी जो कि K.P.Singh को ब्याही और वो मालिक बन गया DLF का । अब K.P.Singh की भी इकलौती बेटी है जो कि कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आज़ाद (गुज्जर से मुस्लिम धर्मान्तरण ) के बेटे सज्जाद नबी आज़ाद के साथ ब्याही गई है ।अब ये DLF का मालिक बनेगा ।
जीवनलाल मशहूर एटलस कम्पनी का मालिक था ।
सूचि की अन्य हस्तियों को तो आप जानते ही हो ।
गहन मंचन की जरूरत है दोस्तों/ भाईयों सोचो और सच्चाई को लोगों तक पहुंचाओ ......
इन्हीं की गवाही के कारण 14 फरवरी 1931 को भगतसिंह व अन्य को फांसी की सजा सुनाई गई ।
नमन हो बलिदान को —
[27/03 1:09 PM] TOL Ravi2: क्या आप facebook और whatsapp कि मदद से पैसे कमाना चाहते है ??
तो दोनो delete कर दो
और काम धन्धे पे लग जाओ...
Thank you😃
[27/03 2:46 PM] TOL Dr. Bir: युद्ध के पश्चात हनुमान जी ने अयोध्या प्रशासन को संजीवनी बूटी लाने के लिए की गयी यात्रा का TA Bill प्रस्तुत किया।
Auditor ने 3 ऑब्जेक्शन लगाये
1. हनुमान जी ने उस समय के राजा (भरत) से यात्रा की पूर्व अनुमति नहीं ली।
2. चूंकि हनुमान जी ग्रेड 2 के अफसर हैं अतः इन्हें हवाई यात्रा की अनुमति नहीं थी।
3. इन्हें केवल संजीवनी बूटी लाने के लिए कहा गया था परंतु इन्होंने पूरा पहाड़ उठा कर ज्यादा लगेज के साथ यात्रा की।
ऑडिटर ने बिल वापिस कर दिया,
राजा राम कुछ नहीं कर पाये और बिल को पुनः परीक्षण के लिए मार्क कर दिया।
चिंतित हनुमान जी ऑडिटर के पास पहुंचे और TA बिल का 20% ऑफर किया।
अब ऑडिटर ने पुनः परीक्षण किया और इस प्रकार Objection Remove किये -
1. उस समय राम अपनी पादुका के माध्यम से राजा थे अतः उनकी अनुमति से यात्रा की गयी।
2.आपातकाल स्थिति में Laxman का जीवन बचाने के लिए की गयी यात्रा में ग्रेड2 अफसर को भी हवाई यात्रा की अनुमति है।
3.यदि गलत पौधा आ जाता तो पुनः यात्रा में ज्यादा खर्च होता अतः अधिक लगेज की अनुमति देते हुए बिल पास किया जाता है।
😳😆😄
जय हो एकाउंट्स विभाग की।
मार्च समाप्ति मुबारक हो।
😎 😎
🌹🙏🌹
😄😄😄
[27/03 4:55 PM] +91 94654 00040: एक बार सच और झूठ नदी में स्नान करने
पहुंचे। दोनो ने अपने-अपने कपड़े उतार
कर नदी के तट पर रख दिए और झट-पट
नदी में कूद पड़े। सबसे पहले झूठ नहाकर
नदी से बाहर आया और सच के कपड़े पहनकर
चला गया। सच अभी भी नहा रहा था। जब वह
स्नान कर बाहर निकला तो उसके कपड़े गायब थे।
वहां तो झूठ के कपड़े पड़े थे। भला सच उसके कपड़े
कैसे पहनता?
कहते हैं तब से सच नंगा है और झूठ सच के कपड़े पहनकर सच के रूप में प्रतिष्ठित है।
[27/03 5:19 PM] +91 94654 00040: मोरक्को के छोटे से गावं में एक बच्चा हामिद
रहता था... उसके स्कूल के बच्चे उसको हमेशा
"उल्लू" बोलकर चिढाते थे और उसकी टीचर उस की
बेवकूफियों से हमेशा बहुत परेशान रहती थी..
एक दिन उसकी माँ उसका रिजल्ट जानने उसके
स्कूल गयी और टीचर से हामिद के बारे में पूछा..
टीचर ने कहा कि "अपने जीवन के पचीस साल के
कार्यकाल में उसने पहली बार ऐसा बेवकूफ लड़का
देखा है, ये जीवन में कुछ न कर पायेगा"
यह सुनकर हामिद की माँ बहुत आहात हो गयी और
उसने शर्म के मारे वो गाँव छोड़कर एक शहर में
चली गयी हामिद को लेकर..
बीस साल बाद जब उस टीचर को दिल की बिमारी हुई तो
सबने उसे शहर के एक डॉक्टर का नाम सुझाया जो
ओपन हार्ट सर्जरी करने में माहिर था.. टीचर ने
जा कर सर्जरी करवाई और ऑपरेशन कामयाब रहा..
जब वो बेहोशी से वापस आई और आँख खोली तो
टीचर ने एक सुदर और सुडौल नौजवान डॉक्टर को
अपने बेड के बगल खड़े हो कर मुस्कुराते हुवे
देखा.. वो टीचर डॉक्टर को शुक्रिया बोलने ही
वाली थी अचानक उसका चेहरा नीला पड़ गया और जब
तक डॉक्टर कुछ समझें समझें.. वो टीचर मर गयी..
डॉक्टर अचम्भे से देख रहे थे और समझने की
कोशिश कर रहे थे की आखिर हुवा क्या है.. तभी
वो पीछे मुड़े और देखा कि हामिद, जो की उसी
अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी था, उसने
वेंटीलेटर का प्लग हटा के अपना वैक्यूम
क्लीनर का प्लग लगा दिया था..
अब अगर आप लोग ये सोच रहे थे कि हामिद डॉक्टर
बन गया था.. तो इसका मतलब ये है की आप हिंदी/
तमिल/तेलुगु फ़िल्में बहुत ज्यादा देखते हैं..
या फिर बहुत ज्यादा प्रेरणादायक कहानियां पढ़ते
हैं..
हामिद उल्लू था और उल्लू ही रहेगा😀😀AMN😀😀
[27/03 5:43 PM] TOL Soninder Singh: Kanjoos Manglu और उसकी Wife एक मेले में
गए।
वहां एक हेलीकाप्टर आया हुआ था, जो मेले
का चक्कर लगवाने के 100 रुपये लेता था।
Manglu हेलीकाप्टर
की सवारी नहीं करना चाहता था, पर
Wife करना chahti थी ।
Manglu : "तू पांच मिनट की सवारी करके तू
कोनसा रानी बन जाएगी, 100 रुपये आखिर
100 रुपये होते है।
Wife फिर भी जिद कर रही थी, और
Manglu बार-बार यही कहे जा रहा था की:
"समझा कर, 100 रुपये आखिर 100रुपये होते
है यार"
उनकी बातचीत पायलट ने सुन ली वो बोला।
पायलट: "सुनो मैं तुम लोगो से कोई
पैसा नहीं लूँगा, लेकिन शर्त ये
होगी की सवारी के दोरान तुम दोनों में से कोई
भी एक शब्द भी नहीं बोलेगा, और अगर
बोला तो 100 रुपये लग जायेगे"
उन्होंने ये शर्त मान ली, पायलट ने उन्हें
पिछली सीट पर बिठाया और उड़ गया। आसमान
में पायलट ने खूब कलाबाजिया की ताकि उन
दोनों की आवाज निकलवा सके
पर पीछे की सीट से कोई नहीं बोला,
आखिर जब वो नीचे उतरने लगे तब पायलट ने
कहा: "अब तुम बोल सकते हो। ये बताओ, मेने
इतनी कलाबाजियां की तुम्हे डर नहीं लगा, ना तुम
चीखे ना चिल्लाये"
Manglu बोला: "डर तो लगा था...
उस वक़्त तो मेरी चीख निकल ही गयी होती जब
Wife नीचे गिरी थी 💃💃👻👻👻
पर यार 100 रुपये आखिर 100 रुपये होते है"😝😝😝😂😂😂😂
No comments:
Post a Comment