Sunday, April 19, 2015

April16

[16/04 8:10 AM] TOL Amandeep Gill: जी. एम. (जेनेटिकैली मॉडिफाइड) बीजों और फसलों के मानवीय स्वास्थ एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाबों की आशंका से अमेरिका जैसे विकशित देश में भी इनके विरुद्ध जनमत काफी प्रबल है और इस सम्बन्ध मे शोध और प्रयोग करने वाली कंपनियों के विरुद्ध लोग, संस्थाएं और संगठन अक्सर अदालतों मे पहुँच जाती है |

लेकिन इसके बावजूत मार्च माह मे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एच. आर 933 प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करके संघीय अदालतों से ऐसे मुकद्दमे दर्ज करने का संबैधानिक अधिकार हि छीन लिया | इस प्रस्ताव को लोकप्रिय भाषा मे मोनसेनटो प्रोटेक्शन एक्ट के रूप मे जाना जाता है | इस कानून के लागु होने से मोनसेनटो के उप्पादों के जीवन और पर्यावरण पर दुष्प्रभावो के बावजूत न तो उसे जी एम फसलों के शोध से रोका जा सकेगा और न हि जनता के सामने ऐसे खाद्यान्न का उपभोग करने के अलावा और कोई चारा रहेगा |

22 अप्रैल को 2–G स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लाक घोटाले के शोर – शराबे मे भारत सरकार ने संसद मे भारतीय जेब टेक्नोलॉजी मे नियमन प्राधिकरण (ब्राइ या बी आर ए आई) बिधेयक 2013 पारित कर दिया | यह बिधेयक पारित होने से बायोटेक्नोलॉजी नीति उपक्रमों के संघ (ए बी एल इ या एबल) ने खूब खुशियाँ मनाई |

यह बिधेयक पास करने के लिए सरकार ने विश्वविख्यात कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता मे 2004 मे गठित की गई कृषि बायोटेक्नोलॉजी टास्कफोर्स की सिफारिशों को भी ताक पर रख दिया | भारत सरकार ने भी इस विधेयेक के माध्यम से बिओतच्नोलोग्य कंपनियों के रास्ते के सभि अवरोध ओबामा की तरह हि दूर कर दिए हैं | अनेक अर्थों मे भारतीय बिधेयक भी ओबामा की बिधेयक जैसा हि है |

ब्राइ बिधेयक पास होने से बायोटेक्नोलॉजी कंपनियां जी. एम. फसलों के लिए फटाफट और एकल खिड़की अनुमति एवं क्लियरेन्स हासिल कर सकेंगी | यहाँ तक की “गोपनीय व्यावसायिक जानकारी” के पर्दे मे इस विधेयक ने इन कंपनियों को सुचना अधिकार के प्रभाव क्षेत्र से भी बाहर निकल दिया है | कई मामलो मे तो इन्हें अदालती क्षेत्राधिकार से भी मुक्त कर दिया गया है | इस तरह बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों और जी. एम. फसलों को शसक्त और कानून संगत कवच प्रदान कर दिया गया है |

पारदर्शिता और जवाबदेही की गला घोटने की जरुरत वोहीं पड़ती है जहाँ किसी खतरनाक चीज को जनता की निगाहों से छिपाना हो | इस काम की शुरुआत सबसे पहले बरिष्ट सरकारी पदों पर बैठे इस उद्योग के समर्थक वैज्ञानिकों और यूनिवर्सिटीयों के प्रोफेसोरों द्वारा होती है जो ‘विज्ञानं – आधारित’ चर्चाओं के नाम पर तथ्यों की तोड़ – मरोड़ करते हैं | ऐसे लोगों मे से कोई भी यह मानने को तैयार नही की जी. एम. फसलें भी पश्चिमी देशों मे ‘मैड काऊ डीजीज’ जैसे खतरनाक रोग के लिए जिम्मेदार थी |

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् खाद्य सुरक्षा के नाम पर बहुत जोर शोर से जी. एम. फसलों के पक्ष मे प्रचार कर रहीं है | जब पर्यावरण मंत्रालय ने इसके वैज्ञानिक दावों पर सवाल उठायें और इस फसलों (खासकर बी.टी. बैगन) की खेती पर 2010 में प्रतिबंध लगा दिया तो उद्योग बचाव की मुद्रा मे आ गया और साथ प्रमुख राज्यों ने इस फसलों की प्रयोगात्मक खेती के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया | फिर पि एम ओ हरकत मे आया और विधेयक को तैयार करने का काम पर्यावरण मंत्रालय से छीन कर साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्रालय के हवाले कर दिया |

इस विधेयक पर गंभीर चर्चा की जरुरत है इसलिए की देश के प्रत्येक व्यक्ति पर जी. एम फसलों के दुष्प्रभाव की तलवार लटक रहीं है | लेकिन पि.एम.ओ. को तो केवल कॉर्पोरेट हितों के कल्याण की हि चिंता है | इस विधेयक ने बायोटेक्नोलॉजी कंपनियो को आपके भोजन, स्वास्थ और पर्यावरण से खिलवाड़ करने की असीम शक्तियां प्रदान कर दी हैं | आप चाहे पसंद करें या न, अब सरकार और जी. एम. कंपनियां यह फैसला करेगी की आप को क्या खाने पर मजबूर किया जाये ?

http://tehelka.com/who-decides-what-we-eat/
[16/04 11:15 AM] ‪+91 94251 91857‬: बस एक करवट ज्यादा ले लूं किसी रोज़ सोते वक़्त..., माँ आज भी आकर पूछ लेती है बेटा, तबियत तो ठीक है...!!
          जय श्री कृष्णा
[16/04 11:31 AM] ‪+91 97799 51799‬: कितने अजब रंग समेटे है ये बेमौसम बारिश खुद मे...

अमीर पकौड़े खाने की सोच रहा है... तो किसान जहर...!!
[16/04 7:39 PM] TOL Satinder Dhaliwal: Everything in the world is beautiful depending on your thoughts, a school bell sounds irritating at 8 AM but the same sound melodious at 2 PM.
[16/04 7:52 PM] TOL Gurpiyar Brar: But our country.. our country s eduction system will be the best on that day when children will be go school as speedily running as they come back on  2 pm
[16/04 7:53 PM] TOL Amandeep Gill: Wt type of education should we adopt these days
[16/04 7:53 PM] TOL Amandeep Gill: ???
[16/04 7:53 PM] TOL Amandeep Gill: Views please
[16/04 7:56 PM] TOL Satinder Dhaliwal: Why should we go for other education system.........???
[16/04 8:02 PM] TOL Amandeep Gill: Suggest please
[16/04 8:03 PM] TOL Amandeep Gill: Ethical or matterialistc education???
[16/04 8:57 PM] ‪+91 94251 91857‬: चार बातें हमेशा यादरखो
पहली बात:-
हर इंसान इतना बुरा नही होता जितना वो पेन कार्ड और आधार कार्ड मैं दीखता है।
और इतना अच्छा भी नही होता जितना वो फेस बुक और वाटस
एप पर दिखता है।
दूसरी बात:-
हर आदमी इतना बुरा नही होता जितना उसकी बीबी उसको समझती है और इतना अच्छा भी नहीं होता जितना उसकी माँ उसको समझती है।
तीसरी बात:-
हर आदमी अपनी लाइफ पार्टनर के बारे मैं सोचता है कि वो मिस यूनिवर्स दिखे और घर मैं काम शांता बाई की तरह करे।
चौथी बात:-
हर औरत अपने लाइफ  पार्टनर के बारे मै सोचती है की वो अम्बानी तरह कमाए और व्यहवहार मनमोहन सिंह की तरह करे।
मंगल कामनाओ सहित समर्पित परन्तु कृपया मुस्कुरायें या हंसे नहीं।
किस्मत हो तो मोदी जी जैसी हो।
सवाल पूछने के लिए विपक्ष में नेता नहीं और घर पर बीबी नहीं।

No चिक चिक...
No छिक छिक।

[16/04 9:01 PM] ‪+91 94251 91857‬: एक समय था जब लोग मौसम का मज़ा लेते थे ।

आजकल मौसम लोगो का मज़ा लेने लगा हैं।।

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