[11/12 10:29 AM] TOL Gagan: Hawa jab khushq patton ko shakh se juda karti hai..
Mujhe tum se bichar jana bahut yaad ata hai..
[11/12 10:29 AM] TOL Gagan: Tujhy Muft Mein Jo Mil Gaye Hum..
Tu Qadr Na Kary Ye Tera Haqq Banta Hai...
[11/12 10:30 AM] +91 94 65 400040: …….काश कोई धर्म न होता
…….काश कोई मजहब न होता
ना गुजरात कभी सिसकता
ना कंधमाल होता
ना गोधरा, गोहाना
ना मिर्चपुर बिलखता
ना तेरा दर्द होता, ना मेरा घाव होता
तुझसे मुझे मुहब्बत, मुझे तुझसे लगाव होता
ना बम धमाके होते, ना गोलियां बरसती
ना असीमानंद होता, ना कसाब होता
…….काश कोई धर्म न होता
…….काश कोई मजहब न होता
ना मस्जिद आजान देती, ना मंदिर के घंटे बजते
ना अल्ला का शोर होता, ना राम नाम भजते
ना हराम होती, रातों की नींद अपनी
मुर्गा हमें जगाता, सुबह के पांच बजते
ना दीवाली होती, और ना पठाखे बजते
ना ईद की अलामत, ना बकरे शहीद होते
…….काश कोई धर्म ना होता
…….काश कोई मजहब ना होता
ना अर्ध देते , ना स्नान होता
ना मुर्दे बहाए जाते, ना विसर्जन होता
जब भी प्यास लगती , नदिओं का पानी पीते
पेड़ों की छाव होती , नदिओं का गर्जन होता
ना भगवानों की लीला होती, ना अवतारों का नाटक होता
ना देशों की सीमा होती , ना दिलों का फाटक होता
…….काश कोई धर्म ना होता
…….काश कोई मजहब ना होता
कोई मस्जिद ना होती, कोई मंदिर ना होता
कोई दलित ना होता, कोई काफ़िर ना होता
कोई बेबस ना होता, कोई बेघर ना होता
किसी के दर्द से कोई, बेखबर ना होता
ना ही गीता होती , और ना कुरान होता
ना ही अल्ला होता, ना भगवान होता
तुझको जो जख्म होता, मेरा दिल तड़पता
ना मैं हिन्दू होता, ना तू मुसलमान होता
तू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सान होता
फिर ना बंगलादेश बंटता, ना पकिस्तान होता
…….काश कोई धर्म ना होता
…….काश कोई मजहब ना होता
ना आतंक वाद होता, ना अत्याचार होता
ना अन्याय होता, ना भ्रष्टाचार होता
ना आबरू सिसकती, ना बलात्कार होता
ना किसी को जख्म मिलता, ना व्यभिचार होता
ना जातियां ही होती , ना बंटाधार होता
जुल्मो-सितम किसी पे, ना बार-बार होता
ना नफरतें ही होती, ना सरहदें ही होती
ना फसाद होते, बस प्यार-प्यार होता
…….काश कोई धर्म ना होता
…….काश कोई मजहब ना होता
ना परमाणुओं का खतरा, ना ऐटम-बम होते
ना मिसाइलों की दहशत, ना ड्रोन-बम होते
ना पासपोर्ट लगता, ना किसी पे शक होता
पृथ्वी की हर जमीन पे, सभी का हक़ होता
ना बेबसी ही होती, ना कोई गरीब होता
दुखों से दूर मानव, सुख के करीब होता
ना रोटी की जंग होती, ना झोपड़ का दर्द होता
संसाधनों का अवसर, सबको नसीब होता
ना तीर्थ कोई , ना हज्ज फर्ज होता
कोई ख़ुदकुशी न करता, ना किसी पे कर्ज होता
…….काश कोई धर्म ना होता
…….काश कोई मजहब ना होता
........Vatish
[11/12 10:54 AM] TOL Parminder Vicky: Wah Gagan Kya bat hai
[11/12 11:01 AM] TOL Ramandeep Singh: Very nice
[11/12 11:03 AM] TOL Ravi2: Samne ho manzil to raaste na modna,
Jo bhi mann mein ho wo sapna na todna,
Kadam kadam pe milegi mushkil aapko,
Bas sitare chun-ne ke liye kabhi zameen mat chodna.
[11/12 11:05 AM] TOL Ravi2: Nigaho mein manzil thi,
gire aur gir kar sambhalte rahe,
hawao ne bahut koshish ki,
magar chirag aandhiyo mein bhi jalte rahe.
[11/12 11:18 AM] TOL Amandeep Gill: Vatish ji vry nice
[11/12 1:12 PM] TOL Mohit Sood: एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ।
लड़का दौड़कर आया।
उसने पानी का गिलास भरकर सेठ
की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में?
लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।
सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या?
यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान
दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया।
उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,
जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्कराय मौन रहा।
जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा।
महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के
पीछे- पीछे गए।
बोले : ऐ लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों?
वह लड़का बोला,
महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी।
वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।
महात्मा ने पूछा -
लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी।
लड़के ने जवाब दिया -
महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता।
वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है।
फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं?
पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है।
वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में
कुछ पाने की तमन्ना होती है,
वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते।
पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती,
वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं।
वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते.
अगर भगवान नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो??
और अगर भगवान हे तो फिर फिक्र क्यों ???
:
" मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।
हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता..
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ...
तो बेशक कहना...
जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी
और जो भी पाया वो रब की मेहेरबानी थी!
खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में,
ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नही...
[11/12 2:07 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: अपनी कीमत उतनी रखिए,
जो अदा हो सके !
अगर अनमोल हो गए तो,
तन्हा हो जाओगे..!
खेल ताश का हो या ज़िन्दगी का,
अपना इक्का तभी दिखाना जब सामने
वाला बादशाह निकाले..
[11/12 6:32 PM] TOL Ajitpal Singh: Raste bhar ro ro ke poochha mujh se paanv ke chhaalon ne,
Basti kitni door bsa li dil mein basne waalon ne....
[11/12 6:33 PM] TOL Ajitpal Singh: mohabbat me nahi hai fark jeene aur marne ka,
Ussi ko dekh kr jeete hain, jis qaafir pe dum nikle....
[11/12 9:34 PM] TOL Deep Sandhu: DEAR ALL
The American Doctors Association has given out answers for the causes of cancer :1.Do not take tea in plastic cups.2.Do not eat anything hot in a plastic bag e.g. chips. 3.Do not heat foodstuffs in a microwave using a plastic material. REMEMBER when plastic gets into contact with heat, it produces chemicals which may cause 52 types of cancer. Therefore, this sms is better than 100 useless sms. Inform your loved ones so as to be free from such effects.
[11/12 9:35 PM] TOL Gurpiyar Brar: Good info
[11/12 10:05 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: सारी दुनिया की खुशी अपनी जगह .... ..
उन सबके बीच तेरी कमी अपनी जगह .....!
[11/12 10:05 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: है परेशानियाँ यूँ तो, बहुत सी ज़िंदगी में;
तेरी मोहब्बत सा मगर, कोई तंग नहीं करता।
[11/12 10:05 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: मुकाम वो चाहिए की जिस दिन
भी हारु ,,
उस दिन जितने वाले से
ज्यादा मेंरे चर्चे हो ..
[11/12 10:05 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: "फ़िर कहाँ खो गया, मालूम नहीं है मुझको...दूर तक खैर मैं करता रहा पीछा अपना...
[11/12 10:05 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: अनकहे शब्दों के बोझ से थक जाता हूँ कभी,
ना जाने खामोश रहना समझदारी है या मजबूरी..!!
[11/12 10:05 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: फिर पलट रही हैं सर्दियों की, रूमानी शामें.....
फिर उनकी याद में सुलगने के ज़माने आये ......
[11/12 10:05 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: मैंने पूछा एक पल में जान कैसे निकलती है......
उसने चलते चलते मेरा हाथ छोड़ दिया...
[11/12 10:07 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: Rabb Ji , Jo tusi ditta oh tuhadi rehmat hai,
Jo nahin ditta us Vichy mera bhala hai aur Jo de k vapis le lya ... oh mera imtihaan hai.
[11/12 10:09 PM] TOL Preet Daman: Very beautiful wordings mr. Prabhjot very motivational thanx i really deserve dis
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