[24/04 6:43 AM] +91 98765 00633: A rare conversation between Ramkrishna Paramahansa & Swami Vivekananda
1. Swami Vivekanand:- I can’t find free time. Life has become hectic.
Ramkrishna Paramahansa:- Activity gets you busy. But productivity gets you free.
2. Swami Vivekanand:- Why has life become complicated now?
Ramkrishna Paramahansa:- Stop analyzing life.. It makes it complicated. Just live it.
3. Swami Vivekanand:- Why are we then constantly unhappy?
Ramkrishna Paramahansa:- Worrying has become your habit. That’s why you are not happy.
4. Swami Vivekanand:- Why do good people always suffer?
Ramkrishna Paramahansa:- Diamond cannot be polished without friction. Gold cannot be purified without fire. Good people go through trials, but don’t suffer.
With that experience their life becomes better, not bitter.
5. Swami Vivekanand:- You mean to say such experience is useful?
Ramkrishna Paramahansa:- Yes. In every term, Experience is a hard teacher. She gives the test first and the lessons .
6. Swami Vivekanand:- Because of so many problems, we don’t know where we are heading…
Ramkrishna Paramahansa:- If you look outside you will not know where you are heading. Look inside. Eyes provide sight. Heart provides the way.
7. Swami Vivekanand:- Does failure hurt more than moving in the right direction?
Ramkrishna Paramahansa:- Success is a measure as decided by others. Satisfaction is a measure as decided by you.
8. Swami Vivekanand:- In tough times, how do you stay motivated?
Ramkrishna Paramahansa:- Always look at how far you have come rather than how far you have to go. Always count your blessing, not what you are missing.
9. Swami Vivekanand:- What surprises you about people?
Ramkrishna Paramahansa:- When they suffer they ask, “why me?” When they prosper, they never ask “Why me?”
10. Swami Vivekanand:- How can I get the best out of life?
Ramkrishna Paramahansa:- Face your past without regret. Handle your present with confidence. Prepare for the future without fear.
11. Swami Vivekanand:- One last question. Sometimes I feel my prayers are not answered.
Ramkrishna Paramahansa:- There are no unanswered prayers. Keep the faith and drop the fear. Life is a mystery to solve, not a problem to resolve. Trust me. Life is wonderful if you know how to live.....☺
[24/04 11:13 AM] TOL Amandeep Gill: इल्युमिनाटी का बृहद्इतिहास-32
तृतीय विश्वयुद्ध के बाद नये धर्म की स्थापना
अभी तक विश्व में दो विश्वयुद्ध हुये तथा पूरे विश्व ने इसकी विभीषिका को
देखा। इन दोनों ही युद्धों की विशेषता यह रही कि इसमें भारत के सैनिकों
ने भाग तो लिया किन्तु भारतीय उपमहाद्वीप पर इसका कोई भयंकर प्रभाव नहीं
पड़ा। ये भारतीयों के लिये अत्यन्त लाभकारी था। यद्यपि ब्रिटेनिया कबीले
द्वारा युद्ध में महत्त्वूपर्ण भूमिका निभाए जाने के कारण भारत को
अपूरणीय आर्थिक क्षति उठानी पड़ी, तथापि जैसा विध्वंस यूरोप में हुआ वैसा
भारत व एशिया के अन्य भागों ने नहीं दिखाई देता है। अमेरीका में भी जापान
ने पर्याप्त विश्वंस किया था।
इन महायुद्धों व विध्वंसों के उपरान्त अमेरीका व यूरोप ने एक संन्धि पर
हस्ताक्षर किये जिसके अन्तर्गत यह निर्णय किया गया कि अब जो कोई भी
युद्ध होगा वह अमेरीका व यूरोप की भूमि पर नहीं होगा अपितु ऐशिया की भूमि
पर ही होगा। इसीलिये तृतीय विश्वयुद्ध का पूर्वाभ्यास जो हुआ है अथवा यदि
कहा जाय कि तृतीय विश्व युद्ध प्रारम्भ हुआ है वह एशिया के मुस्लिम बहुल
क्षेत्र में हुआ है। तथा ये इसाईयों और मुसलमानों का परम्परागत युद्ध है
जिसे ईसाई क्रूसेड और मुसलमान जिहाद कहते हैं।
ऐसी सम्भावना व्यक्त की जाती है कि तृतीय विश्वयुद्ध के उपरान्त विश्व
में एक नये धर्म की स्थापना होगी। तथा असुर ही राज्य करेंगे जो कि बाइबल
के अनुसार लिखित है वह वस्तुत: आर्मेगेडन के रूप में प्रकट होगा।
आर्मेगेडन का युद्ध व बाइबिल- प्राचीन ईजिप्ट व असीरिया को जोड़ने वाले
एक व्यापारी मार्ग को मेगेडन कहा जाता था। इसका क्षेत्र वर्तमान इस्राइल
से होकर गुजरा करता था। और यही वह स्थान हैं जहाँ कई युद्ध भी लड़े गये।
स्पष्ट है कि ये यात्रा हेतु प्रयोग में लिया जाने वाला मैदानी क्षेत्र
है और पर्याप्त विस्तृत भी इसीलिये यहाँ युद्ध भी होते रहे। यहाँ प्रथम
युद्ध ईसा से 7000 वर्ष पूर्व में लड़ा गया जब बेबीलोनिया के नागरिकों
द्वारा इस्राइलियों का प्रथम मन्दिर तोड़ दिया गया था। इससे यह तो
सर्वसिद्ध हेाता है कि इस्राईली यहूदी मूर्त्ति पूजक थे। सम्भवत: वे
वैदिक देवताओं की ही पूजा करते हों। इस स्थान में कई युद्ध हुये जिनमें
से प्रमुख रूप से 1443 वि.पू. (र्ईसा से 1500 वर्ष पूर्व) एक युद्ध हुआ
जो ईजिप्ट की सेना और फराओं तृतीय के मध्य लड़ा गया। उसके बाद द्वितीय
युद्ध विपू.552 (ईसा पूर्व 609) में हुआ। ये युद्ध ईजिप्ट की सेना और
फराओं की सेना के बीच हुआ। इसी प्रकार 1975 वि.सं.(ईस्वी सन्1918) में
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय भी यहाँ दो अलग अलग राष्ट्रों की सेना ने
युद्ध किया था। 2011 वि.सं.(ईस्वी सन्1964) में ईसाईयों के तात्कालिक
धर्मगुरू ने वहाँ का दौरा किया था तथा ईस्राइल के विशिष्टाधिकारियों व
राष्ट्रपति से भेंट भी की थी। अत: इस प्रकार के युद्धों को ही आर्मेगेडोन
कहा गया है। जिसका पुरानी बाइबिल में विवरण प्राप्त होता है। ऐसे में
पोकोके की पुस्तक इण्डिया इन ग्रीस को पढ़ा जाय तो वहाँ उचित निर्णय हमें
प्राप्त हो सकते हैं।
तृतीय विश्व युद्ध को कुछ संस्थाएँ इसी रूप में प्रस्तुत करेंगी कि युद्ध
का स्वरूप मात्र विभिन्न प्रकार के शस्त्र नहीं होंगे अपितु विभिन्न
प्रकार के कीटाणुओं का युद्ध होगा। उस युद्ध में कई प्रकार के संक्रामक
रोगों का फैलाव होगा उसी कारण कई लोग मारे जायेंगे। यद्यपि लेखक ने इसका
समय 1992-99 तक बताया है किन्त आज तक युद्ध हुआ नहीं है, परन्तु अभी 2019
में इस युद्ध के होने की सम्भावना दिखाई दे रही है। इस्लामिक स्टेट और
बोको हरम नामक आतंकी संगठनों ने जो मार्ग अपनाया है वह विश्व को किसी न
किसी युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा करेगा। इनका आराध्य एक असुर गुरू है
जिसे सुबह का तारा ल्यूसिफर, शुक्र ग्रह कहा गया है। भारतीय
धर्मशास्त्रों में इसे असुरों के गुरू के रूप में जाना जाता है।
बेटरबाए ने एक हिटलर पर पुस्तक लिखी जो कि उसे एक पवित्र व्यक्ति मानता
था उसमें उसने उस पुस्तक में स्पष्ट रूप से सिद्ध किया कि असुरी शक्तियों
ने कार्लमाक्स से क्या अपेक्षाएँ करते हुये उससे दास कैपिटल नामक पुस्तक
लिखवाई और उसे 1952 तक उसी रूप में समझाते हुये लेकर आये। यही उस पुस्तक
का उद्देश्य था। कार्लमाक्स को दास केपिटल लिखने के लिये राथचाईल्ड ने ही
उकसाया व समझाया था। मैसोनिक समूह ही ऐसा है जिसके द्वारा असुर अपने सारे
तन्त्र का संचालन करता है यानि छिपे हुये असुरों का प्रकट मुखड़ा है
मैसोनिक सम्प्रदाय में दीक्षित समूह।
इनकों असुरों से आदेश मिला थाकि साम्यवाद को प्रारम्भ किया जाय वस्तुत:
यह असुरों का ही उद्देश्य था। असुरों द्वारा उनके सम्प्रदाय में दीक्षित
अत्यन्त उच्च स्तरीय दो लोगों को जिनके नाम थे अलबर्ट पाइक व गॉसैपी
मेजिनी के द्वारा इस सम्पूर्ण तन्त्र का संचालित किया जाना निश्चित हुआ।
मार्क्स के द्वारा जिस साम्यवाद की स्थापना हुई उसी के विरूद्ध एक चेहरा
खड़ा किया जिसका नाम था हिटलर जिसने साम्यवादी समाजवाद के विरूद्ध
राष्ट्रीय समाजवाद को खड़ा किया और नाम दिया नाजीवाद। तब सभी छद्म
संस्थाओं ने जिसमें इल्युमिनाटी भी सम्मिलित थी मिलकर एक थल सोसाइटी का
निर्माण किया। हिटलर भी इसी काले तन्त्र की समिति का सदस्य था। ये समिति
मेसोनिक और हिन्दू धार्मिक चिह्नों का प्रयोग किया करती थी। इन नाजियों
का ही एक गुप्त संगठन था थियासोफिकल सोसाइटी यद्यपि इसकी स्थापना बहुत
वर्षों पूर्व ही हो चुकी थी किन्तु ये संगठन भी इन्हीं असुरों के समूह का
एक स्वरूप था।
हिटलर के मरने के बाद भी कई मैसानिक, और अन्य गुप्त संस्थाएँ हिन्दू
स्वस्तिक चिह्न का प्रयोग करती रही। क्येांकि उनको इसका महत्त्व ज्ञात हो
चुका था। कि मात्र असुरों से ही काम नहीं चलेगा। कहीं कहीं पर दैवीय
शक्तियों का आह्वान करना ही पड़ेगा।
हिटलर के द्वारा होलीग्रेल एक पवित्र प्याला है कहते हैं हिटलर ने उसे
युद्ध के समय अपने पास रखा था। एवं युद्ध समाप्त होने से पूर्व उसके एक
गुप्त सहयोगी संगठन एस एस द्वारा 2 मई 1945 के द्वारा श्लैजेसिसि नामक
हिमनद (ग्लेशियर) पर 3000 मीटर की गहराई में छिपा दिया गया। यदि उस
क्षेत्र में कोई उस प्याले को ढूँढता हुआ मिल जाता है, तो उसे पकड़ कर
उसके अंग भंग करके छोड़ दिया जाता है। वर्तमान में भी वह क्षेत्र
सुरक्षित क्षेत्रों में आता है।
डॉ.दिलीप कुमार नाथाणी
[24/04 8:30 PM] TOL Dr. Bir: वि. आय. पि. V I P कौन है?
अमेरिका में सिर्फ दो तरह के लोगो को वि आय पि मानते है।
1) वैज्ञानिक और शिक्षक।
2) फ्रांस के कोर्ट में सिर्फ शिक्षको को ही कुर्सी पर बैठने का अधिकार है।
3) जापान में पुलिस को सरकार से अनुमति लेने के बाद ही किसी शिक्षक को गिरफ्तार कर सकते है।
4) कोरिया में हर शिक्षक को वो सारे अधिकार प्राप्त है जो भारत के मिसिस्टर को प्राप्त है सिर्फ अपना आय कार्ड दिखा कर।
और भारत में यदि शिक्षक को अपनी पगार के लिए कोई आवाज़ उठाये या आंदोलन करे तो भारतीय पुलिस उन्हें डंडे मारती है। एक ऐसा समाज जहा शिक्षको का अपमान होता रहेगा वहाँ सिर्फ चोर, डाकू, लुटेरे और भ्रष्टाचारी लोग ही पनपते है।
🚩शिक्षक बचाओ देश बचेगा🚩
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