[04/05 7:43 AM] +91 98765 00633: ⌚Titan to Rolex⌚
Titan : Tu bhi waqt batata hai, mein bhi waqt batata hu, lekin phir bhi teri izzat zyada kyu hai ??
Rolex : Dost....Tu "insaan ko waqt" batata hai Aur mein...
"Insaan Ka Waqt" Batata hu ...!
Ultimate One..👌😂😂
😂😂😂😆😆
[04/05 11:18 AM] +91 97799 51799: मै यादों का
किस्सा खोलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत
याद आते हैं.. 😌
📼📼📼📼📼📼📼
मै गुजरे पल को सोचूँ
तो कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.. 😔
📼📼📼📼📼📼📼
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद हैं जाकर मुद्दत से.
मैं देर रात तक जागूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..
📼📼📼📼📼📼
कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
मैं शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..
📼📼📼📼📼📼
सबकी जिंदगी बदल गयी
एक नए सिरे में ढल गयी
_____________________
कोई girlfriend में busy है..
कोई बीवी के पीछे crazy हैं..
_____________________
किसी को नौकरी से फुरसत नही
किसी को दोस्तों की जरुरत नही
______________________
कोई पढने में डूबा है..
किसी की दो दो महबूबा हैं..
____________________
सारे यार गुम हो गये हैं
तू से तुम और आप हो गये है
📼📼📼📼📼📼📼
मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं..... 😔
Dedicated to all my loving frnds..
😘😘😍😍😘😘😘
[04/05 1:00 PM] TOL Money Matters: ਕੌਣ ਸੀ ਛੱਲਾ ?.. ਕੀ ਕਹਾਣੀ ਸੀ ਛੱਲੇ ਦੀ..?ਗੁਰਦਾਸ ਮਾਨ
ਤੇ ਛੱਲਾ ਜਿਸ ਨੂੰ
ਤਕਰੀਬਨ-ਤਕਰੀਬਨ ਸਾਰੇ ਕਲਾਕਾਰਾਂ ਨੇ ਗਇਆ ਹੈਉਸ
ਛੱਲੇ ਦੀ ਦੁੱਖ
ਭਰੀ ਦਾਸਤਾਨ ਸ਼ਾਇਦ ਤੁਸੀਂ ਨਾ ਸੁਣੀ ਹੋਵੇ…
ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੀ ਛੱਲੇ ਨਾਲ
ਦਿਲੀਂ ਸਾਂਝ ਹੈ ਸਾਇਦ ਹੀ ਕੋਈ ਅਜਿਹਾ ਪੰਜਾਬੀ ਹੋਵੇ
ਜਿਸਨੇ
ਆਪਣੀ ਜਿੰਦਗੀ(Life) ਚ’ ਕਦੇ ਛੱਲਾ ਨਾ ਗੁਣਗੁਨਾਇਆ
ਹੋਵੇ| ਪਰ ਬਹੁਤ ਘੱਟ
ਲੋਕ ਹੋਣਗੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਛੱਲੇ ਦੇ ਪਿਛੋੜਕ ਬਾਰੇ
ਪਤਾ ਹੋਵੇਗਾ….… ਕੌਣ ਸੀ ਇਹ
ਛੱਲਾ ??..ਕੀ ਕਹਾਣੀ ਸੀ ਛੱਲੇ ਦੀ..???”ਛੱਲਾ” ਇਕ
ਪਿਓ ਪੁੱਤ ਦੀ ਦਾਸਤਾਨ
ਹੈ|ਜੱਲਾ ਨਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਮਲਾਹ ਹਰੀਕੇ ਪੱਤਣ ਦਾ ਰਹਿਣ
ਵਾਲਾ ਸੀ ਜਿਸ ਨੂੰ ਰੱਬ
ਨੇ ਇੱਕ ਪੁੱਤਰ ਨਾਲ ਨਿਵਾਜਿਆ ਸੀ| ਜੱਲੇ ਮਲਾਹ ਨੇ
ਉਸਦਾ ਨਾਮ ਛੱਲਾ ਰੱਖਿਆ
ਸੀ| ਇੱਕੋ ਇੱਕ ਪੁੱਤਰ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਜੱਲੇ ਨੇ ਉਸਨੂੰ ਬੜੇ
ਲਾਡਾਂ (cuddle) ਨਾਲ
ਪਾਲਿਆ| ਜਦ ਛੱਲਾ ਛੋਟਾਸੀ ਤਾਂ ਉਸਦੀ ਮਾਂ ਮਰ ਗਈ |
ਜੱਲਾ ਮਲਾਹ
(boatman) ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਕੰਮ ਤੇ ਲੈ ਜਾਂਦਾ|ਇੱਕ
ਦਿਨ ਛੱਲੇ ਨੂੰ ਨਾਲ
ਲੈ ਕੇ ਜਦ ਜੱਲਾ ਮਲਾਹ ਕੰਮ ਤੇ ਗਿਆ ਤਾਂ ਜੱਲੇ ਮਲਾਹ
ਦੀ ਸਿਹਤ ਖਰਾਬ ਹੋ
ਗਈ ਅਤੇ ਉਸਨੇ ਸਵਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਬੇੜੀ (boat)’ਚ ਬਿਠਾਕੇ
ਦੂਸਰੀ ਪਾਰ ਲਿਜਾਣ
ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ|ਸਵਾਰੀਆਂ ਕਹਿਣ ਲੱਗੀਆਂ ਕੇ
ਆਪਣੇ ਪੁੱਤ ਨੂੰ ਕਹਿ ਦੇ
ਉਹ ਸਾਨੂੰ ਦੁਸਰੇ ਪਾਸੇ ਛੱਡ ਆਵੇਗਾ|
ਪਹਿਲਾਂ ਤਾਂ ਜੱਲਾ ਮੰਨਿਆ ਨਹੀ ਪਰ
ਸਾਰਿਆਂ ਦੇ ਜੋਰ ਪਾਉਣ ਤੇ ਜੱਲੇ ਮਲਾਹ ਨੇ ਛੱਲੇ ਨੂੰ
ਬੇੜੀ ਲਿਜਾਣ ਲਈ
ਕਹਿ ਦਿੱਤਾ ਸਾਰੇ ਬੇੜੀ ਚ’ ਸਵਾਰ ਹੋਕੇ ਦਰਿਆ ‘ਚ ਚਲੇ
ਗਏ|
ਛੱਲਾ ਚਲਾ ਤਾਂ ਗਿਆਲੇਕਿਨ ਕਦੇ ਵਾਪਿਸ
ਨਹੀ ਮੁੜਿਆ| ਸਤਲੁਜ ਤੇ ਬਿਆਸ
‘ਚ ਪਾਣੀ ਬਹੁਤ ਚੜ ਗਿਆ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਰੋੜ ਕੇ ਆਪਣੇ
ਨਾਲ ਲੈ ਗਿਆ |ਜੱਲੇ
ਮਲਾਹ ਨੂੰ ਉਡੀਕਦੇ -ਉਡੀਕਦੇ ਨੂੰ ਦਿਨ ਢਲ ਗਿਆ| ਪਿੰਡ
ਵਾਲੇ ਵੀ ਆ ਗਏ
ਅਤੇ ਛੱਲੇ ਨੂੰ ਲੱਭਣ ਲੱਗ ਗਏ ਕਈ ਦਿਨਾ ਤੱਕ ਲੱਭਦੇ ਰਹੇ
ਪਰਛੱਲਾ ਨਾ ਮਿਲਿਆ
| ਪੁੱਤ ਦੇ ਵਿਛੋੜੇ ਵਿਚ ਜੱਲਾ ਮਲਾਹ ਪਾਗਲ ਹੋ ਗਿਆ |ਓਹ
ਨਦੀ ਕਿਨਾਰੇ
ਗਾਉਂਦਾ ਫਿਰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ…”” ਛੱਲਾ ਮੁੜਕੇ
ਨਹੀ ਆਇਆ,
ਰੋਣਾ ਉਮਰਾਂ ਦਾ ਪਾਇਆ, ਮੱਲਿਆ ਮੁਲਕ(country)
ਪਰਾਇਆ ….ਜਦ ਜੱਲੇ
ਮਲਾਹ ਨੂੰ ਛੱਲੇ ਦੀ ਮਾਂ ਚੇਤੇ ਆਉਂਦੀ ਤਾਂ ਉਹ
ਸੋਚਦਾ ਕਿ ਕਾਸ਼ ਉਹ
ਜਿਉਂਦੀ ਹੁੰਦੀ ਤਾਂ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਛੱਲੇ ਨੂੰ ਨਾਲ ਨਹੀ ਸੀ ਲੈ ਕੇ
ਆਉਣਾ ਅਤੇ
ਮੇਰਾ ਪੁੱਤ ਅੱਜ ਜਿੰਦਾ ਹੋਣਾ ਸੀ ਤੇ ਉਹ ਰੋਂਦਾ-
ਰੋਂਦਾ ਗਾਉਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦਾ,,””ਗੱਲ
ਸੁਣ ਛੱਲਿਆ ਕਾਵਾਂ, ਮਾਵਾਂ ਠੰਡੀਆਂ
ਛਾਵਾਂ……”ਜੱਲਾ ਪਾਣੀ ਚ’ ਹੱਥ ਮਾਰਦਾ ਤੇ
ਲੋਕ ਪੁੱਛਦੇ ਕਿ ਜੱਲਿਆ ਕੀ ਲੱਭਦਾ ਏਂ…?
ਤਾਂ ਜੱਲਾ ਕਹਿੰਦਾ…”” ਛੱਲਾ ਨੌ-ਨੌ
ਖੇਵੇ, ਪੁੱਤਰ ਮਿੱਠੜੇ ਮੇਵੇ, ਅੱਲਾ ( God ) ਸਭ ਨੂੰ ਦੇਵੇ….ਰਾਤ ਹੋ
ਜਾਂਦੀ ਤਾਂ ਲੋਕ ਕਹਿੰਦੇ ਜੱਲਿਆ ਘਰ ਨੂੰ
ਚਲਾ ਜਾ ਤਾਂ ਜੱਲਾ ਕਹਿੰਦਾ ਹੈ””ਛੱਲਾ ਬੇੜੀ ਦਾ ਪੂਰ
ਏ, ਵਤਨ ਮਾਹੀਏ ਦਾ ਦੂਰ
ਏ, ਜਾਣਾ ਪਹਿਲੇ ਪੂਰ ਏ………”ਇਸ ਤਰਾਂ ਜੱਲਾ ਮਲਾਹ
ਆਪਣੇ ਪੁੱਤ ਦੀ ਯਾਦ
ਚ’ ਅਪਣੀ ਜਿੰਦਗੀ ਗੁਜ਼ਾਰਦਾ ਰਿਹਾ| ਫਿਰ ਉਹ
ਹਰੀਕੇ ਤੋਂ ਗੁਜਰਾਤ
(ਪਾਕਿਸਤਾਨ) ਚਲਾ ਗਿਆ| ਅਪਣੀਜਿੰਦਗੀ ਦੇ ਕੁੱਝ
ਸਾਲ ਜੱਲੇ ਨੇ ਗੁਜਰਾਤ ਚ’
ਬਿਤਾਉਣ ਤੋਂ ਬਆਦ ਉਸਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ| ਅੱਜ ਵੀ ਗੁਜਰਾਤ
(ਪਾਕਿਸਤਾਨ) ਚ
ਉਸਦੀ ਸਮਾਧੀ ਬਣੀ ਹੋਈਹੈ…
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[04/05 3:47 PM] +91 94251 91857: कृपया इसे ध्यान से पढ़े और अपने मित्रों और परिवार को सलाह दें !
आप किसी का जीवन बचा सकते हैं !
पहली घटना: एक छोटा बच्चा इसलिए मर गया क्योंकि डॉक्टर को उसके दिमाग में चींटियाँ ही चींटियाँ मिली ! जो स्पष्ट करता है कि बच्चा या तो मुँह में कोई मीठी चीज रख के सो गया या या उसके बगल में सोते समय कोई खाने की मीठी चीज रखी रह गई. चींटियाँ उसके पास पहुँच गईं और उसके कान के अंदर घुस गई और वहाँ से किसी तरह उसके दिमाग तक पहुँच गयी. जब बच्चा जागा उसे पता भी नहीं चला की चींटियाँ उसके सिर में पहुँच गई. उसके बाद उसने लगातार अपने चेहरेे में खुजलाहट की शिकायत की. उसकी माँ उसको डॉक्टर के पास ले गई पर डॉक्टर को भी तत्काल कुछ समझ नहीं आया कि उसके साथ क्या परेशानी है.जब उसने बच्चे का X-ray लिया तब घटना की भयंकरता का पता चला। उसने जीवित चींटियों की भीड़ को उसकी खोपड़ी में रेंगते देखा,पर डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर सका क्योंकि चींटियाँ लगातार एक स्थान से दूसरी स्थान तक उसके दिमाग में घूम रहीं थीं। अंत में बच्चा मर गया। अतः बिस्तर में खाते समय कोई भी खाने की चीज बिस्तर के पास न छोड़े । खाने की चीज चींटियों को आकर्षित कर सकती है। और सबसे महत्वपुर्ण बिस्तर में जाने से पहले आप या आपके बच्चों को मिठाई नहीं खानी चाहिए । ऐसा करके आप या आपके बच्चे सोते समय चींटियों को निमंत्रण देंगे।
दूसरी घटना: ऐसी ही सामान घटना ताइवान के हॉस्पिटल में हुई । यह व्यक्ति हॉस्पिटल में एडमिट था। उसे नर्सों के द्वारा लगातार चेतावनी दी गई थी की हॉस्पिटल में चींटियों की समस्या है अतः कोई भी खाने की चीज अपने बिस्तर के पास न रखे। पर उसने उनकी सलाह पे ध्यान ही नहीं दिया। और अंत में चींटियों का शिकार बन गया । उसके परिवार वालों ने बताया की वह लगातार सर दर्द की शिकायत करता था। वह मर गया और उसका पोस्ट मोरटम या ऑटोप्सी किया गया। डॉक्टरों ने उसके सिर में जिन्दा चींटियों का समूह पाया । स्पष्ट बात है की चींटियाँ उसके दिमाग के एक हिस्से को खा रहीं थीं। तो मित्रों, दुःख मनाने से अच्छा सुरक्षित रहना है। जब भी आप सोने जाएं अपने बिस्तर के पास खाने पिने की चीज न छोड़ें। यदि आप किसी के जीवन का ध्यान रखते हैं....... तो सन्देश को आगे भेजें।
मेरा निवेदन है कि कृपा कर अपने सारे ग्रुप में जरूर भेजें....
[04/05 4:01 PM] +91 94251 91857: वो भी क्या दिन थे...
🌼 जब घड़ी एक आध के पास होती थी और समय सबके पास होता था।
🌼 बोलचाल में हिंदी का प्रयोग होता था और अंग्रेज़ी तो पीने के बाद ही बोली जाती थी।
🌼 लोग भूखे उठते थे पर भूखे सोते नहीं थे।
🌼 फिल्मों में हीरोइन को पैसे कम मिलते थे पर कपड़े वो पूरे पहनती थी।
🌼 लोग पैदल चलते थे और पदयात्रा करते थे पर पदयात्रा पद पाने के लिये नहीं होती थी।
🌼 साईकिल होती थी जो चार रोटी में चालीस का एवरेज देती थी।
🌼 चिट्ठी पत्री का जमाना था। पत्रों मे व्याकरण अशुद्ध होती थी पर आचरण शुद्ध हुआ करता थे।
🌼 शादी में घर की औरतें खाना बनाती थी और बाहर की औरतें नाचती थी अब घर की औरतें नाचती हैं और बाहर की औरते खाना बनाती है।
🌼 खाना घर खाते थे और शौच बाहर जाते थे और अब शौच घर में करते हैँ और खाना खाने बाहर जाते हैँ।
Rishabh jain
[04/05 4:01 PM] +91 94251 91857: आज का विचार: अगर परछाईयाँ कद से और बातें औकात से बड़ी होने लगे तो समझ लीजिये कि सूरज डूबने ही वाला है..!
[04/05 4:01 PM] +91 94251 91857: अगर 'तुम' उसे ना 'पा' सको,
जिसे तुम 'प्यार' करते हो तो.....
.
.
शर्म करो,
.
.
.
लाओ 'नंबर' मुझे दो....
'मैं' 'कोशिश' करता हूँ..।
में भी तो 'देंखु' 'दिक्कत' कहा आ
रही हे..... 😄😃😘😘😘😳
[04/05 4:01 PM] +91 94251 91857: जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है... कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है !!!!
[04/05 4:46 PM] TOl Dr. Prabhjot Singh: national recognisation of Electro homeopathy system of medicine bill passed in Loksabha
[04/05 5:21 PM] TOL Amrinder Singh: Very good
[04/05 5:28 PM] +91 94251 91857: जाने क्यूँ
अब शर्म से,
चेहरे गुलाब नहीं होते।
जाने क्यूँ
अब मस्त मौला मिज़ाज़ नहीं होते।
पहले बता दिया करते थे,
दिल की बातें।
जाने क्यूँ अब चेहरे,
खुली किताब नहीं होते।
सुना है बिना कहे
दिल की बात समझ लेते थे।
गले लगते ही दोस्त
हालात समझ लेते थे।
तब ना फेस बुक थी,
ना स्मार्ट मोबाइल था,
ना फेसबुक, ना ट्विटर अकाउंट था,
एक चिट्टी से ही
दिलों के जज़्बात समझ लेते थे।
सोचता हूं
हम कहाँ से कहाँ आ गये,
प्रेक्टिकली सोचते सोचते
हम भावनाओं को खा गये।
अब भाई भाई से
समस्या का समाधान
कहां पूछता है,
अब बेटा बाप से
उलझनों का निदान
कहां पूछता है,
बेटी नही पूछती मां से
गृहस्थी के सलीके
अब कौन गुरु के चरणों में
बैठकर
ज्ञान की भाषा सीखे।
परियों की बातें
अब किसे भाती हैं
अपनो की यादें
अब किसे रुलाती हैं,
अब कौन
गरीबों को सखा बताता है
अब कहाँ
कृण्ण सुदामा को गले लगाता है।
जिन्दगी में
हम प्रेक्टिकल हो गये हैं
मशीन बन गये है सब
इंसान जाने कहाँ खो गये हैं!
...............................
इंसान जाने कहां खो गये है....!!!!
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