Sunday, May 17, 2015

May 3

[03/05 9:19 AM] TOL Money Matters: नारी की सुंदरता का रहस्य

शायद आपको पता नहीं होगा,स्त्री पुरुषों से ज्यादा सुंदर क्यों दिखाई पड़ती है? शायद आपको खयाल न होगा,स्त्री के व्यक्तित्व में एक राउन्डनेस,एक सुडौलता क्यों दिखाई पड़ती है? वह पुरुष के व्यक्तित्व में क्यों नहीं दिखाई पड़ती? शायद आपको खयाल में न होगा कि स्त्री के व्यक्तित्व में एक संगीत,एक नृत्य,एक इनर डांस,एक भीतरी नृत्य क्यों दिखाई पड़ता है जो पुरुष में नहीं दिखाई पड़ता।

एक छोटा-सा कारण है। एक छोटा सा,इतना छोटा है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इतने छोटे-से कारण पर व्यक्तित्व का इतना भेद पैदा हो जाता है। मां के पेट में जो बच्चा निर्मित होता है उसके पहले अणु में चौबीस जीवाणु पुरुष के होते है और चौबीस जीवाणु स्त्री के होते हैं। अगर चौबीस-चौबीस के दोनों जीवाणु मिलते हैं तो अड़तालीस जीवाणुओं का पहला सेल(कोष्ठ)निर्मित होता है। अड़तालीस सेल से जो प्राण पैदा होता है वह स्त्री का शरीर बन जाता है। उसके दोनों बाजू 24-24 सेल के संतुलित होते हैं।

पुरुष का जो जीवाणु होता है वह सैंतालिस जीवाणुओं का होता है। एक तरफ चौबीस होते हैं,एक तरफ तेइस। बस यहीं संतुलन टूट गया और वहीं से व्यक्तित्व का भी। स्त्री के दोनों पलड़े व्यक्तित्व के बाबत संतुलन के हैं। उससे सारा स्त्री का सौंदर्य,उसकी सुड़ौलता,उसकी कला,उसके व्यक्तित्व का रस,उसके व्यक्तित्व का काव्य पैदा होता है और पुरुष के व्यक्तित्व में जरा सी कमी है। क्योंकि उसका तराजू संतुलित नहीं है,तराजू का एक पलड़ा चौबीस जीवाणुओं से बना है तो दूसरा तेईस का। मां से जो जीवाणु मिलता है वह चौबीस का बना हुआ है और पुरुष से जो मिलता है वह तेईस का बना हुआ है। पुरुष के जीवाणुओं में दो तरह के जीवाणु होते हैं: चौबीस कोष्ठधारी और तेईस कोष्ठधारी। तेईस कोष्ठधारी जीवाणु अगर मां के चौबीस कोष्ठधारी से मिलता है तो पुरुष का जन्म होता है और यदि पुरुष के चौबीस कोष्ठधारी स्त्री के चौबीस कोष्ठधारी से मिलता है तो स्त्री का जन्म होता है। निश्चित ही स्त्री के गर्भ में पल रहा बच्चा स्त्री होगा या पुरुष,इसके लिए जिम्मेवार स्त्री नहीं बल्कि पुरुष है। चूंकि पुरुष की पैदाइश एक असंतुलन से होती है,इसलिए पुरुष में एक बेचैनी जीवन भर बनी रहती है,एक असंतोष बना रहता है। क्या करुं,क्या न करुं,एक चिन्ता,एक बेचैनी,यह कर लूं,वह कर लूं। पुरुष की जो बेचैनी है वह एक छोटी सी घटना से शुरु होती है और वह घटना है कि उसके एक पलड़े पर एक अणु कम है। उसके व्यक्तित्व का संतुलन कम है। स्त्री का संतुलन पूरा है,उसकी लयबद्धता पूरी है। इतनी सी घटना इतना फरक लाती है। इससे स्त्री सुंदर तो हो सकी लेकिन विकासमान नहीं हो सकी; क्योंकि जिस व्यक्तित्व में समता है वह विकास नहीं करता,वह ठहर जाता है।पुरुष का व्यक्तित्व विषम है। विषम होने के कारण वह दौड़ता है,विकास करता है। एवरेस्ट चढ़ता है,पहाड़ पार करता है,चांद पर जाएगा,तारों पर जाएगा,खोजबीन करेगा,सोचेगा,ग्रंथ लिखेगा,धर्म-निर्माण करेगा। स्त्री यह कुछ भी नहीं करेगी। न वह एवरेस्ट पर जाएगी,न वह चांद-तारों पर जाएगी,न वह धर्मों की खोज करेगी,न ग्रंथ लिखेगी,न विज्ञान की शोध करेगी। वह कुछ भी नहीं करेगी। उसके व्यक्तित्व में एक संतुलन उसे पार होने के लिए तीव्रता से नहीं भरता है। पुरुष ने सारी सभ्यता विकसित की। इस एक छोटी सी जैविक परिघटना के कारण। उसमें एक अणु कम है। स्त्री ने सारी सभ्यताएं विकसित नहीं की। उसमें एक अणु पूरा है। इतनी सी जैविक परिघटना व्यक्तित्व का भेद ला देती है।
[03/05 9:35 AM] ‪+91 98765 00633‬: Few Beautiful lines...

किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!
डरिये वक़्त की मार से,
बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..!
अकल कितनी भी तेज ह़ो,
नसीब के बिना नही जित सकती..!
बिरबल अकलमंद होने के बावजूद,
कभी बादशाह नही बन सका...!!"
"ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो, ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो ! एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है! इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से! रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते है !!!
[03/05 11:36 AM] ‪+91 94251 91857‬: ट्रेन को पुलिस ने चारों तरफ से घेर रखा था क्योंकि बिना टिकट वालों की चेकिंग हो रही थी !!

इतने में एक सरदार जी ट्रेन से कुदे और लगे भागने
उनको भागते देख सभी पुलिस वाले , मजिस्ट्रेट सब उसको पकडने दौडे
देखते ही देखते सरदार जी के साथ कई लोग भागने लगे ,
चुंकि सभी पुलिस वालों और मजिस्ट्रेट का ध्यान सरदार जी की तरफ था इसलिए दुसरों के उपर किसी का ध्यान नहीं गया !!

अंत में सरदार जी को पकडा गया लेकिन साथ दौडने वाले भाग निकले
फिर पुलिस वालों ने सरदारजी से टिकट दिखाने को कहा

सरदार जी ने जेब से तुरंत टिकट निकाला और मजिस्ट्रेट के हाथों में रख दिया !

सभी हक्के बक्के ,

मजिस्ट्रेट ने चिल्लाकर पुछा जब तेरे पास टिकट थी तो तुम भागे क्यों ?

सरदार जी मौन रहे हल्के से मुस्कराते रहे !!

जब मजिस्ट्रेट ने ज्यादा जोर देकर पुछा तो सरदार जी ने मुंह खोला और कहा "हजारों सवालों से अच्छी है मेरी दौड, ना जाने कितने बेटिकटों की आबरू बच गई " !!!!

मतलब सरदार जी तो ईमानदार रह गए लेकिन कई घोटाले बाज़ों को अपने ईमानदारी के सर्टिफिकेट से बचा ले गए।। 
                           
इस कहानी का डॉ. मनमोहन सिंह से कुछ लेना देना नहीं है
[03/05 11:36 AM] ‪+91 94251 91857‬: लड़कों और
लड़कियों की दोस्ती में
ये हैं फर्क

दो लडकियां आमने-सामने जब
बातकरती हैं।

पहली - हाए स्वीटहार्ट।

दूसरी - हाई , मेरी शोना , आई
मिस यू।

...और दोनों एक दुसरे के बारे में पीठ
पीछे बोलती हैं।

पहली - अरे वो एक नंबर
की नकचढ़ी हैं, घमंडी हैं।

दूसरी - मैं तो उसे भाव
ही नहीं देती , शक्ल से
बंदरिया लगती हैं

जब 2 लड़के जब आमने सामने बात करते हैं।

पहला - कैसा हैं कमीने ,
लाल शर्ट में
तो bandar लग रहा हैं बे।

दूसरा - अपने बाप से मजाक
करता हैं साले।

और दोनों एक दुसरे के बारे में पीठ पीछे बोलते हैं।

पहला - मस्त बंदा हैं यार।

दूसरा - खबरदार उसके बारे में कुछ गलत बोला तो, भाई हैं वो मेरा।

Kamine Dosto ke liye share to
banta h...
😘😘😘

Love u yaaro
[03/05 12:07 PM] TOL Gurpiyar Brar: पानी ने दूध से मित्रता की और उसमे समा गया..
जब दूध ने पानी का समर्पण देखा तो उसनेn कहा-
मित्र तुमने अपने स्वरुप का त्याग कर मेरे स्वरुप को धारण किया है....
अब मैं भी मित्रता निभाऊंगा और तुम्हे अपने मोल बिकवाऊंगा।

दूध बिकने के बाद जब उसे उबाला जाता है तब पानी कहता है..
अब मेरी बारी है मै मित्रता निभाऊंगा और तुमसे पहले मै चला जाऊँगा..
दूध से पहले पानी उड़ता जाता है जब दूध मित्र को अलग होते देखता है तो उफन कर गिरता है और आग को बुझाने लगता है, जब पानी की बूंदे उस पर छींट कर उसे अपने मित्र से मिलाया जाता है तब वह फिर शांत हो जाता है।

पर इस अगाध प्रेम में..
थोड़ी सी खटास-
(निम्बू की दो चार बूँद)
डाल दी जाए तो दूध और पानी अलग हो जाते हैं..
थोड़ी सी मन की खटास अटूट प्रेम को भी मिटा सकती है।

रिश्ते में..
खटास मत आने दो॥
"क्या फर्क पड़ता है,
हमारे पास कितने लाख,
कितने करोड़,
कितने घर,
कितनी गाड़ियां हैं,

खाना तो बस दो ही रोटी है।
जीना तो बस एक ही ज़िन्दगी है।
I
फर्क इस बात से पड़ता है,
कितने पल हमने ख़ुशी से बिताये,
कितने लोग हमारी वजह से खुशी से जीए। 💐💐💐 💐💐💐💐💐💐💐
[03/05 2:06 PM] TOL Dr. Bir: Pesticide Percentage (%) in cool drinks released from IMA recently.

1     Thums up     15.2% 
2     Coke              13.4%     
3     7 up                12.5%     
4     Mirinda          10.7%    
5     Pepsi              10.9%     
6     Fanta              9.1%     
7.    Sprite.            15.3%

Then its very dangerous to the Human Liver. Results in Cancer!
So don't drink any brand from Coke and Pepsi!
This Message is from

Indian Medical Association. Please pass it to all known persons in your contact   Save Indians!!!............
[03/05 3:03 PM] ‪+91 94633 82482‬: >>>>>सरकारी अध्यापको के लिए पढ़ाना इतना महत्वपूर्ण नही है जितने की अन्य कार्य|
1. पढाओ मत वोट बनाओ, और बनाने के बाद उसे आधार कार्ड से लिंक करो पर बच्चो को पढाई से लिंक मत करो.
2. पढाओ मत कमरे बनओ, टॉयलेट बनवाओ, रैंप बनाओ पर बच्चो को पढ़ाकर उनका भविष्य मत बनाओ.
3. मिड डे मील बनवाओ और बंटवाओ पर ज्ञान मत बांटो.
4. बच्चो को वर्दी खरीद कर दो, उन्हें बैग और स्टेशनरी खरीद कर दो पर उन्हें शिक्षा मत दो.
5. पढाओ मत पर पेपर जरूर लो और सबको पास करो | मतलब सर्टिफिकेट दो ज्ञान नही |
6. पढाओ मत, बच्चो का सारा डाटा ऑनलाइन करो | MIS में लगे रहो चाहे बच्चे तुम्हे MISS क्यों ना करते रहे|
7. पढाओ मत पर बच्चो के बैंक खाते जरुर खुलवाओ| बच्चो को कुछ सीख मिले या ना मिले पर उन्हें पैसे जरुर मिलने चाहिए |
8. डाक का काम जरुर पूरा हो चाहे बच्चो की पढ़ाई पूरी हो या ना हो |
9. नन्हे बच्चो को जाति के आधार पर SC, BC और GEN श्रेणी में बाँट कर जातिवाद के बीज बचपन से ही बो दो यानी पढ़ाई में सहयोग दो या ना दो पर वोट बैंक की राजनीति में जरुर सहयोग दो |
10. और हाँ 1 अप्रैल से 22 मई तक पढ़ाई मत करवाओ सारा दिन गतिविधियाँ (CRP) करवाओ और ज्यादा से ज्यादा फोटो खींचो क्योंकि फोटो खींचना इस बात का प्रमाण है की बच्चे बहुत कुछ सीख रहे हैं|
ये कुछ ऐसे कार्य हैं जो अध्यापको से जबरदस्ती कराये जाते हैं....इन्ही के कारण शिक्षा का स्तर निचे गिर रहा है, और सरकार भी यही चाहती है क्योंकि इससे उन्हें शिक्षा का निजीकरण करने में आसानी रहेगी |
इन सब बाधाओं के बावजूद भी जो सरकारी अध्यापक मेहनत करके बच्चो को कुछ सिखा पा रहे हैं उनके चरणों में मेरा शत शत नमन |

No comments:

Post a Comment